Chaitra chhath 2026: चैती छठ भारत में मनाया जाने वाला एक प्रसिद्ध पर्व है. कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से इस चार दिवसीय पर्व की शुरुआत होती है. यह हिंदू धर्म के सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है. छठ महापर्व की शुरुआत नहाय-खाय से होती है और समापन उषा अर्घ्य के साथ होता है. इस दौरान व्रती 36 घंटे का निर्जला उपवास रखती हैं और सूर्य देव तथा छठी मैया की आराधना करती हैं. मान्यता है कि इस व्रत को करने से संतान की आयु लंबी होती है, घर में सुख-समृद्धि आती है और आरोग्य की प्राप्ति होती है.
नहाय-खाय की सरल विधि
पवित्र स्नान: इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान किया जाता है. यदि नदी में स्नान करना संभव न हो, तो घर पर पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करें. इसके बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें.
सफाई: स्नान के बाद घर के मंदिर और रसोई की अच्छी तरह सफाई करें. छठ में शुद्धता का विशेष महत्व होता है.
संकल्प: मंदिर में दीपक जलाएं और छठी मैया का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें. साथ ही “ॐ श्री सूर्यषष्ठी व्रत करिष्ये” मंत्र का जाप करें. इस दिन चूल्हे की पूजा कर भोजन बनाया जाता है.
भोजन: भोजन को पहले माता को अर्पित करें. इसके बाद सबसे पहले व्रती भोजन ग्रहण करती हैं.
नहाय-खाय में क्या खाएं?
इस दिन कम मसालों के साथ शुद्ध भोजन बनाया जाता है, जैसे:
- सब्जी: कद्दू या लौकी की सब्जी
- पकौड़े: कद्दू के पकौड़े
- दाल: चने की दाल
- चावल: अरवा चावल (भात)
- नमक: साधारण नमक की जगह सेंधा नमक का उपयोग किया जाता है
क्या करें और क्या न करें
- लहसुन-प्याज वर्जित: पूरे चार दिनों तक घर में लहसुन और प्याज का प्रयोग न करें.
- स्वच्छता: व्रती के कपड़े साफ और धुले हुए होने चाहिए. झूठे हाथों से पूजा सामग्री को न छुएं.
- व्यवहार: व्रत के दौरान गुस्सा न करें और किसी से विवाद न करें. मन को शांत रखें.
- भोजन नियम: पहले व्रती भोजन ग्रहण करती हैं, उसके बाद ही परिवार के अन्य सदस्य प्रसाद ग्रहण करते हैं.
