Bhishma Ashtami 2026: भीष्म अष्टमी 2026 कब है? जानें शुभ तिथि, पूजा-विधि और इस पावन व्रत का महत्व

Bhishma Ashtami 2026: भीष्म अष्टमी पितरों की शांति और कृपा प्राप्त करने का पावन अवसर है. इस दिन व्रत, तर्पण और दान करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और भीष्म पितामह व पितरों के आशीर्वाद से जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है.

Bhishma Ashtami 2026: भीष्म अष्टमी 26 जनवरी 2026 दिन सोमवार को पड़ रही है. पंचांग के अनुसार, इस दिन माघ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि है. ज्योतिषाचार्य एवं हस्तरेखा विशेषज्ञ चंद्रशेखर सहस्त्रबाहु: ने बताया कि (चंद्रमा को बढ़ते क्रम को शुक्ल पक्ष कहते है) माघ शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 25 जनवरी की रात 08 बजकर 45 मिनट पर शुरू होगी और 26 जनवरी की शाम 06 बजकर 37 मिनट तक रहेगी, इस दिन श्राद्ध कर्म करने का शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 35 मिनट से सुबह 07 बजकर 56 मिनट तक रहेगा या सुबह 9 बजकर 19 मिनट से सुबह 10 बजकर 39 मिनट तक रहेगा.

Bhishma Ashtami 2026 Puja Vidhi: भीष्म अष्टमी पूजा विधि

ब्रह्म मुहूर्त में पवित्र नदी या घर पर गंगाजल मिले जल से स्नान करें और व्रत का संकल्प लें.
पूजा स्थल साफ कर भीष्म पितामह का चित्र या मूर्ति स्थापित करें और कलश रखें.
तिल, जल और कुशा लेकर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके तर्पण करें.
जनेऊ बाएं कंधे पर रखकर अर्घ्य अर्पित करें और मंत्र जाप करें.
दीपक जलाकर धूप-दीप, चंदन, फूल और नैवेद्य अर्पित करें.
भीष्म अष्टमी को दिन भर व्रत रखें और भीष्म पितामह की कथा सुनें.
भीष्म अष्टमी पर श्रद्धा से विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें.
मंत्र जाप: “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” या “ॐ भीष्माय नमः” जैसे मंत्रों का जाप करें.
शाम को ब्राह्मण भोजन कराएं और अन्न, वस्त्र, तिल व गुड़ का दान करें.

भीष्म अष्टमी व्रत करने से मिलते हैं ये लाभ

धार्मिक ग्रंथों में भीष्म अष्टमी के दिन व्रत रखने का खास महत्व बताया गया है, इस दिन व्रत करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और पितरों को शांति प्राप्त होती है. पितरों का आशीर्वाद बना रहने से जीवन में सुख और समृद्धि आती है. यह भी माना जाता है कि इस व्रत को करने से जातक को गौरवशाली और आज्ञाकारी संतान की प्राप्ति होती है. इस दिन किए गए व्रत और तर्पण से भीष्म पितामह का आशीर्वाद भी बना रहता है.

क्यों खास है भीष्म अष्टमी

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भीष्म पितामह के देहांत के बाद पांडवों ने उनका श्राद्ध किया था. तभी से पितरों के श्राद्ध और तर्पण के लिए इस तिथि को बहुत शुभ माना जाता है. ऐसा करने से पितरों की कृपा बनी रहती है. इस दिन दान करने के भी विशेष लाभ बताए गए हैं. भीष्म अष्टमी पर तिल, उबले चावल, वस्त्र और अन्न का दान करना शुभ माना जाता है, जिससे जीवन में सुख-शांति आती है. इस दिन पितृ स्तोत्र का पाठ करना भी लाभकारी होता है.

भीष्म अष्टमी का महत्व

भीष्म पितामह, राजा शांतनु और माता गंगा के पुत्र थे. उन्हें अपने पिता से इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त था. इस वरदान के अनुसार, वे जब चाहें अपने प्राण त्याग सकते थे. भीष्म पितामह ने अपने प्राण त्यागने के लिए माघ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को चुना था. इसी कारण इस दिन को भीष्म अष्टमी कहा जाता है. भीष्म अष्टमी के दिन लोग भीष्म पितामह के लिए एकोदिष्ट श्राद्ध करते हैं. इस दिन पितरों के लिए तर्पण करना बहुत शुभ माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इससे पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है और परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है.

ज्योतिषाचार्य चंद्रशेखर सहस्त्रबाहु:
ज्योतिष एवं हस्त रेखा विशेषज्ञ | 12 साल का अनुभव
Mo- +91 8620920581

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By Radheshyam Kushwaha

पत्रकारिता की क्षेत्र में 13 साल का अनुभव है. इस सफर की शुरुआत राज एक्सप्रेस न्यूज पेपर भोपाल से की. यहां से आगे बढ़ते हुए समय जगत, राजस्थान पत्रिका, हिंदुस्तान न्यूज पेपर के बाद वर्तमान में प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में धर्म अध्यात्म एवं राशिफल डेस्क पर कार्यरत हैं. ज्योतिष शास्त्र, व्रत त्योहार, राशिफल के आलावा राजनीति, अपराध और पॉजिटिव खबरों को लिखने में रुचि हैं.

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