Basant Panchami 2026: बसंत पंचमी मां सरस्वती का पावन पर्व है. बसंत पंचमी इस साल 23 जनवरी 2026 दिन शुक्रवार को मनाई जाएगी. मां सरस्वती को ज्ञान, बुद्धि और कला की देवी माना जाता है. सााल 2026 में बसंत पंचमी बहुत शुभ मानी जा रही है. यह दिन छात्रों, कलाकारों और करियर में आगे बढ़ने वालों के लिए खास है. इस दिन किए गए छोटे-छोटे उपाय जीवन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं. सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त इस दिन सुबह 7:58 बजे से सुबह 10:58 बजे तक रहेगा. आइए जानते हैं ज्योतिषाचार्य चंद्रशेखर सहस्त्रबाहु: से कि सफलता पाने के लिए इस दिन क्या करना चाहिए…
Basant Panchami 2026: पूजा की आसान विधि
बसंत पंचमी में पीले रंग का खास महत्व होता है. पीला रंग सकारात्मकता, खुशी और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है. पीले फूल, अक्षत, चंदन, हल्दी, फल और मिठाई मां सरस्वती को अर्पित करें. केसरयुक्त खीर या बूंदी का भोग विशेष फलदायी माना जाता है.
Basant Panchami Puja Vidhi सरल पूजा विधि
सुबह स्नान करके साफ और पीले रंग के कपड़े पहनें.
मां सरस्वती की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें.
पीले फूल, पीले चावल और पीली मिठाई अर्पित करें.
किताब, कॉपी, कलम या वाद्य यंत्र मां के सामने रखें.
“ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः” मंत्र का जाप करें.
पढ़ाई में मन लगाने के उपाय
अगर बच्चों का पढ़ाई में मन नहीं लगता, तो उनके कमरे में मां सरस्वती की तस्वीर लगाएं. बसंत पंचमी के दिन फल अर्पित करें और रोज पढ़ाई से पहले मां सरस्वती को याद करें.
करियर और नौकरी में सफलता के उपाय
नौकरी या बिजनेस में परेशानी हो तो बसंत पंचमी के दिन सफेद चंदन का तिलक लगाएं. जरूरतमंद बच्चों को किताब, कॉपी या पेन दान करें, इससे करियर में आगे बढ़ने के रास्ते खुलते हैं.
वाणी दोष दूर करने के उपाय
अगर बोलते समय डर, झिझक या रुकावट आती है, तो केसर से ‘ऐं’ बीज मंत्र लिखें. यह उपाय वाणी को प्रभावशाली बनाता है.
नई शुरुआत के लिए शुभ दिन
बसंत पंचमी को अबूझ मुहूर्त माना जाता हैं. इस दिन नया घर लेना, नई गाड़ी खरीदना या नया काम शुरू करना बहुत शुभ होता है, इसके लिए अलग से मुहूर्त देखने की जरूरत नहीं होती.
बच्चों की पढ़ाई शुरू करने का श्रेष्ठ दिन
छोटे बच्चों की पढ़ाई की शुरुआत बसंत पंचमी के दिन करना बहुत शुभ माना जाता है. इस दिन विद्यारंभ संस्कार करने से बच्चा पढ़ाई में अच्छा करता है.
बसंत पंचमी 2026 का महत्व
बसंत पंचमी सिर्फ एक त्योहार नहीं है, बल्कि यह ज्ञान और नई शुरुआत का प्रतीक है. इस दिन से मौसम में बदलाव आता है और प्रकृति में नई ऊर्जा दिखाई देती है. मान्यता है कि इसी दिन मां सरस्वती प्रकट हुई थीं, इसलिए इस दिन उनकी पूजा का विशेष महत्व होता है.
ज्योतिषाचार्य चंद्रशेखर सहस्त्रबाहु:
ज्योतिष एवं हस्त रेखा विशेषज्ञ | 12 साल का अनुभव
Mo- +91 8620920581
