Basant Panchami 2026 Date: 23 जनवरी 2026 दिन शुक्रवार को बसंत पंचमी का त्योहार मनाया जाएगा. यह पर्व हर साल माघ शुक्ल पंचमी तिथि को मनाया जाता है. इस साल बसंत पंचमी पर बुधादित्य, शुक्रादित्य, लक्ष्मी नारायण योग से लेकर गजकेसरी राजयोग का निर्माण हो रहा है. ज्योतिषाचार्य चंद्रशेखर सहस्त्रबाहु: ने बताया कि बसंत पंचमी के दिन 23 जनवरी को चंद्रमा मीन राशि रहेंगे. देव गुरु बृहस्पति मिथुन राशि में स्थित रहेंगे. चंद्रमा से चौथे भाव में गुरु की मौजूदगी गजकेसरी योग बनाएगी. इसके अलावा बसंत पंचमी पर रवि योग दोपहर 02 बजकर 33 मिनट से 24 जनवरी को सुबह 06 बजकर 36 मिनट तक रहेगा. शिव योग दोपहर 03 बजकर 25 मिनट से 24 जनवरी को दोपहर 01 बजकर 03 मिनट तक रहेगा.
बसंत पंचमी 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त
श्रीहृषीकेश पंचांग के अनुसार, माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि 22- जनवरी की रात 01 बजकर 18 मिनट पर प्रारंभ हो रही है, जो 23 जनवरी की रात 12 बजकर 08 मिनट पर समाप्त होगी. उदया तिथि (जिस तिथि में सूर्योदय होता है) के अनुसार बसंत पंचमी का पर्व 23 जनवरी 2026 दिन शुक्रवार को मनाया जाएगा. बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त 23 जनवरी को सुबह 7 बजकर 58 मिनट से लेकर दोपहर 10 बजकर 40 मिनट तक का है.
मां सरस्वती को लगाए इन चीजों का भोग
खीर- दूध, चावल और मिश्री से बनी खीर मां सरस्वती का प्रिय भोग है.
सफेद मिठाइयां- रसगुल्ला, बर्फी, पेड़ा या चावल से बनी मिठाइयां
दूध और मिश्री- शुद्ध दूध में मिश्री मिलाकर अर्पित करें.
सफेद फल – केला, नारियल, सफेद सेब या नाशपाती.
पंचामृत – दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से बना पंचामृत.
मालपुआ या हलवा- केसर युक्त हलवा या मालपुआ का भोग लगाएं
सरस्वती पूजा सामग्री लिस्ट
बसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा के लिए हल्दी, कुमकुम, रोली, सिंदूर, अक्षत, धूप-दीप, इत्र, आम के पत्ते, पीले फूल-माला, लकड़ी की चौकी, पीला वस्त्र, कलश, केला, नारियल, मालपुआ, घी, दूध की मिठाई, तिल लड्डू, गुलाल, श्रृंगार सामग्री और पीली चुनरी या साड़ी की जरुरत होती है.
सरस्वती पूजा विधि
बसंत पंचमी की सुबह स्नान कर पूजा स्थान पर पीला वस्त्र बिछाएं.
मां सरस्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें.
गंगाजल छिड़ककर आचमन व स्नान कराएं.
फूल, माला, अक्षत, सिंदूर और श्रृंगार सामग्री अर्पित करें.
सरस्वती माता के चरणों में गुलाल अवश्य लगाएं.
वस्त्र अर्पित कर विधि-विधान से पूजा करें.
मिठाई, फल और पकवान का भोग लगाएं.
पुस्तक, कॉपी आदि की पूजा करें.
गणेश जी के साथ मां सरस्वती की आरती करें.
प्रसाद वितरण करें और शाम को पुनः पूजा करें.
सरस्वती पूजा मंत्र
या कुन्देन्दु तुषार हार धवला, या शुभ्रवस्त्रावृता।
या वीणावरदण्डमण्डितकरा, या श्वेतपद्मासना॥
या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिः देवी सदा वन्दिता॥
सावित्रे सरस्वती नमोऽस्तु ते॥
मां सरस्वती की आरती
जय सरस्वती माता,
मैया जय सरस्वती माता ।
सदगुण वैभव शालिनी,
त्रिभुवन विख्याता ॥
जय जय सरस्वती माता…॥
चन्द्रवदनि पद्मासिनि,
द्युति मंगलकारी ।
सोहे शुभ हंस सवारी,
अतुल तेजधारी ॥
जय जय सरस्वती माता…॥
बाएं कर में वीणा,
दाएं कर माला ।
शीश मुकुट मणि सोहे,
गल मोतियन माला ॥
जय जय सरस्वती माता…॥
ज्योतिषाचार्य चंद्रशेखर सहस्त्रबाहु:
ज्योतिष एवं हस्त रेखा विशेषज्ञ | 12 साल का अनुभव
Mo- +91 8620920581
