Baglamukhi Jayanti Upay: हिंदू धर्म में वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मां बगलामुखी की जयंती मनाई जाती है. वर्ष 2026 में यह पावन पर्व 24 अप्रैल, शुक्रवार को मनाया जाएगा. सनातन परंपरा में मां बगलामुखी को शक्ति की विशेष स्वरूप माना गया है, जो अपने भक्तों की रक्षा करती हैं. धार्मिक मान्यता है कि सच्चे मन से उनकी आराधना करने वाले भक्तों के जीवन से संकट, भय और शत्रु बाधाएं दूर हो जाती हैं.
मां बगलामुखी की पूजा और साधना का महत्व
मां बगलामुखी की पूजा विशेष रूप से शत्रुनाश, वाद-विवाद में विजय और कोर्ट-कचहरी के मामलों में सफलता के लिए की जाती है. उन्हें “स्तम्भन शक्ति” की देवी कहा जाता है, जो नकारात्मक शक्तियों को रोकने की क्षमता रखती हैं. उनकी कृपा से व्यक्ति को आत्मबल, साहस और मानसिक शांति प्राप्त होती है. इस दिन व्रत, जप और विशेष अनुष्ठान करना अत्यंत फलदायी माना गया है.
मां बगलामुखी की जयंती पर उपाय में उपयोग होने वाली सामग्री
बगलामुखी जयंती पर किए जाने वाले उपायों में कुछ विशेष वस्तुओं का उपयोग किया जाता है, जिनका आध्यात्मिक महत्व होता है:
- मुट्ठी भर पीली सरसों
- शत्रुओं के फोटो
- 108 लाल मिर्च
- एक मिट्टी का पात्र
- लगभग 250 ग्राम कपूर
उपाय करने की विधि
इस उपाय को श्रद्धा और नियम के साथ करना चाहिए. सबसे पहले एक मिट्टी के पात्र में शत्रुओं की फोटो रखें. इसके बाद 36 अक्षरी मंत्र का जाप करते हुए प्रत्येक मंत्र के साथ 108 सरसों के दाने और लाल मिर्च फोटो पर रखें. अंत में एक बार मंत्र बोलकर अपनी मनोकामना व्यक्त करें. फिर पात्र में कपूर रखकर उसे जला दें.
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उपाय का समापन और सावधानियां
जब यह प्रक्रिया पूरी हो जाए, तो बची हुई राख को किसी पवित्र नदी में प्रवाहित कर दें. ऐसा माना जाता है कि इस उपाय से नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और शत्रुओं से मुक्ति मिलती है. हिंदू धर्म में ऐसे उपाय केवल श्रद्धा, संयम और सकारात्मक भाव के साथ करने चाहिए. यह न केवल बाहरी बाधाओं को दूर करने का माध्यम हैं, बल्कि व्यक्ति के आत्मविश्वास और आस्था को भी मजबूत करते हैं.
