चैत्र नवरात्रि में अष्टमी-नवमी सन्धि का दुर्लभ संयोग, ज्योतिषाचार्य से जानें आध्यात्मिक महत्व

Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि का धार्मिक महत्व अलग-अलग कारणों से माना जाता है. चैत्र नवरात्रि को सृष्टि के आरम्भ और नए वर्ष की शुरुआत से जोड़ा जाता है.

प्रथमं शैलपुत्री च,द्वितीय ब्रह्मचारिणी,तृतीयं चंण्डघन्तिटे,कुष्माण्डेति चतुर्थकम्।
पंचम स्कन्धमातेति, षष्ठं कात्यायनीत च,सप्तमं कालरात्रिति महागौरी चाष्टमम्,नवं सिद्धिदात्री च नौ दुर्गा प्रकीर्तिता।।

Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि और शारदीय दुर्गा नवरात्रि में क्या फर्क है? यह बात बहुत कम लोग जानते हैं. चैत्र नवरात्रि से लेकर वर्ष में चार नवरात्रि आती है. चैत्र माह में वसन्त नवरात्रि, आषाढ़ माह में गुप्त नवरात्रि, आश्‍विन माह में शारदीय नवरात्रि और माघ माह में गुप्त नवरात्रि. सभी नवरात्रियां एक-दूसरे से अलग हैं. आषाढ़ और माघ माह की गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की पूजा होती है, जबकि चैत्र और आश्‍विन माह में नौ दुर्गा की पूजा होती है. आइए जानते हैं कि आश्‍विन या शारदीय नवरात्रि से चैत्र या वसन्त नवरात्रि किस तरह अलग है.

Chaitra Navratri 2026: समय और ऋतु का अन्तर

आचार्य विनोद त्रिपाठी ने बताया कि सबसे बड़ा अन्तर इनके समय और मौसम का होता है. चैत्र नवरात्रि में वसन्त का आगमन होता, जबकि शारदीय नवरात्रि में ठंडक का आरम्भ होता हैं. चैत्र नवरात्रि पंचांग के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होती है. यह आमतौर पर मार्च–अप्रैल के महीने में आती है और इसी दिन से हिन्दू नववर्ष भी शुरू माना जाता है. वहीं शारदीय नवरात्रि आश्विन मास के शुक्ल पक्ष में आती है, जो सामान्यतः सितम्बर–अक्टूबर में पड़ती है. चैत्र नवरात्रि से ही हिन्दू नववर्ष की शुरुआत होती है, जबकि शारदीय नवरात्रि वर्ष के मध्य का समय होता है.

चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि का धार्मिक महत्व

चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि का धार्मिक महत्व अलग-अलग कारणों से माना जाता है. चैत्र नवरात्रि को सृष्टि के आरम्भ और नए वर्ष की शुरुआत से जोड़ा जाता है. कई मान्यताओं के अनुसार इसी समय भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना की थी.

चैत्र नवरात्रि अष्टमी और नवमी के संन्धिकाल महत्व

साल 2026 के चैत्र नवरात्रि में अष्टमी (महागौरी की पूजा) का आरम्भ 25 मार्च 2026 को दिन 4 बजकर 30 मिनट पर होगा और नवमी तिथि की शुरुआत 26 मार्च 2026 को दिन 2 बजकर 15 मिनट पर होगी. उदया तिथि के कारण महागौरी अष्टमी 26 मार्च को ही माना जायेगा. वहीं नवमी तिथि का जुड़ना शुरू हो जाता है, इसे ही अष्टमी और नवमी का सन्धि काल माना जायेगा. 26 मार्च 2026 के दिन अन्नपूर्णा परिक्रमा, महागौरी पूजन का विधान है, जो एक दुर्लभ संयोग है. इस दिन रात्रि में मां गौरी का व्रत, पूजन, जप-तप, बलि, दीपक जलाने से, रात्रि जागरण करने से अभीष्ट सिद्धियां एवं मनोवांच्छित लाभ प्राप्त होते हैं. विशेष रूप से माता जी के माया बीज मंत्र *”ऊँ ह्रीं” मंत्र का जप करने से धन-धान्य की वृद्धि और सुखी जीवन बना रहता है.

चैत्र नवरात्र के आखिरी दिन रामनवमी

शारदीय नवरात्रि को मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय से जोड़ा जाता है, इसलिए दसवें दिन विजयादशमी (दशहरा) का पर्व मनाया जाता है. चैत्र नवरात्र के अन्त में रामनवमी आती है, एवं इस नवरात्रि में शक्ति और विष्णु, दोनों की आराधना की जाती है, जबकि शारदीय नवरात्रि के अन्त में दुर्गा महानवमी आती है. दूसरे दिन विजयादशमी आती है. धार्मिक मान्यता है कि, विजयादशी के दिन जहां मां दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था. वहीं श्रीराम ने रावण का वध किया था, इसलिए नवरात्रि में शुद्ध रूप से शक्ति की उपासना की जाती है.

पूजा और परम्पराएं

पूजा-पाठ दोनों नवरात्रियों में लगभग समान होते हैं, लेकिन उत्सव का स्वरूप अलग हो सकता है. चैत्र नवरात्रि में अधिकतर लोग घर पर घटस्थापना, व्रत और पाठ करते हैं. शारदीय नवरात्रि में बड़े स्तर पर गरबा, डांडिया, दुर्गा पंडाल और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, खासकर पश्चिम बंगाल और गुजरात में. चैत्र नवरा‍त्रि के दिनों में साधना का खासा महत्व रहता है, जबकि शारदीय नवरात्रि के दिन दुर्गा पूजा और आराधना का महत्व रहता है. शारदीय नवरात्रि में सात्विक साधना, नृत्य और उत्सव मनाया जाता है, जबकि चैत्र नवरात्रि में कठिन साधना और कठिन व्रत का महत्व होता है

सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव

चैत्र नवरात्रि अधिकतर धार्मिक और आध्यात्मिक साधना पर केंद्रित होती है, शारदीय नवरात्रि का स्वरूप ज्यादा उत्सव और सामाजिक आयोजन वाला होता है. चैत्र नवरात्रि का महत्व खासकर महाराष्ट्र, आंध प्रदेश, तेलांगना और कर्नाटक में रहता है, जबकि शारदीय नवरात्रि की महत्व खासकर पश्चिम बंगाल और गुजरात में रहता है. शारदीय नवरात्रि को सांसारिक इच्छाओं की पूर्ति हेतु मनाया जाता है, जबकि चैत्र नवरात्रि को आध्‍यात्मिक इच्छाओं की पूर्ति, सिद्धि, मोक्ष के लिए मनाया जाता है. चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि दोनों ही मां दुर्गा की आराधना के पवित्र पर्व हैं. फर्क केवल इनके समय, धार्मिक मान्यता और उत्सव के स्वरूप में है. चैत्र नवरात्रि जहां नए वर्ष और आध्यात्मिक साधना का प्रतीक है, वहीं शारदीय नवरात्रि मां दुर्गा की विजय और उत्सव का पर्व मानी जाती है.

Also Read: खरमास और पंचक के पेंच में फंसा चैत्र नवरात्र की घटस्थापना? ज्योतिषाचार्य से जानिए पूजा की सही विधि और समय

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Radheshyam Kushwaha

पत्रकारिता की क्षेत्र में 13 साल का अनुभव है. इस सफर की शुरुआत राज एक्सप्रेस न्यूज पेपर भोपाल से की. यहां से आगे बढ़ते हुए समय जगत, राजस्थान पत्रिका, हिंदुस्तान न्यूज पेपर के बाद वर्तमान में प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में धर्म अध्यात्म एवं राशिफल डेस्क पर कार्यरत हैं. ज्योतिष शास्त्र, व्रत त्योहार, राशिफल के आलावा राजनीति, अपराध और पॉजिटिव खबरों को लिखने में रुचि हैं.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >