आषाढ़ अमावस्या पर दुर्लभ शुभ योगों में करें पूजा, पितृ कृपा और सुख-समृद्धि के खुलेंगे द्वार

Ashadha Amavasya 2026: 14 जुलाई 2026 को पड़ने वाली आषाढ़ अमावस्या/हलहारिणी अमावस्या धार्मिक, आध्यात्मिक और कृषि दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है. इस दिन पितृ तर्पण, दान-पुण्य, वृक्षारोपण और विशेष पूजा से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होने की मान्यता है.

Ashadha Amavasya 2026: सनातन धर्म में आषाढ़ मास की अमावस्या को अत्यंत पुण्यदायी माना गया है. इस वर्ष आषाढ़ अमावस्या/हलहारिणी अमावस्या 14 जुलाई 2026 को मनाई जाएगी. यह तिथि पितृ तर्पण, ध्यान, दान और देवी-देवताओं की विशेष उपासना के लिए समर्पित मानी जाती है. साथ ही इसे किसानों का पर्व भी कहा जाता है, क्योंकि इस दिन कृषि कार्यों में उपयोग होने वाले हल और अन्य उपकरणों की पूजा का विशेष विधान है. मान्यता है कि ऐसा करने से अच्छी फसल और अन्न-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है.

शुभ योग और मुहूर्त: पूजा के लिए बन रहे दुर्लभ संयोग

इस वर्ष आषाढ़ अमावस्या/हलहारिणी अमावस्या पर सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग जैसे अत्यंत शुभ संयोग बन रहे हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन योगों में की गई पूजा, जप और दान का फल कई गुना बढ़ जाता है. पूजा के लिए प्रातःकाल के कई शुभ मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे, जिन्हें धार्मिक कार्यों और विशेष अनुष्ठानों के लिए अनुकूल माना गया है. ऐसे शुभ संयोगों में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना विशेष फलदायी मानी जाती है.

वृक्षारोपण का महत्व: पितरों का मिलता है आशीर्वाद

आषाढ़ मास वर्षा ऋतु की शुरुआत का समय होता है, इसलिए इस दिन पौधे लगाना अत्यंत शुभ माना गया है. मान्यता है कि मंदिर परिसर या किसी पवित्र स्थान पर पीपल, बरगद या नीम का पौधा लगाने से पितृ प्रसन्न होते हैं और परिवार पर अपनी कृपा बनाए रखते हैं. वहीं घर में बेलपत्र या आंवले का पौधा लगाने से भगवान शिव और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होने की मान्यता है.

बाधा मुक्ति के उपाय: दान और सेवा का महत्व

हलहारिणी अमावस्या पर अन्न और जल का दान विशेष पुण्यदायी माना जाता है. काली चींटियों को शक्कर मिला आटा खिलाना तथा मछलियों को आटे की गोलियां देना पारंपरिक रूप से शुभ माना गया है. वहीं पीपल के वृक्ष को जल अर्पित करने और काले कुत्ते को तेल लगी रोटी खिलाने जैसे उपाय ग्रह दोषों की शांति और नकारात्मक प्रभावों को कम करने के लिए किए जाते हैं.

लक्ष्मी कृपा के लिए करें यह उपाय

धार्मिक मान्यता के अनुसार अमावस्या की संध्या बेला में घर के ईशान कोण में गाय के घी का दीपक जलाना शुभ माना जाता है. दीपक में कलावे की बत्ती और थोड़ा केसर डालकर प्रज्वलित करने से माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होने तथा आर्थिक उन्नति के मार्ग प्रशस्त होने की मान्यता है. श्रद्धा और नियमपूर्वक किए गए ये उपाय घर में सुख, शांति और समृद्धि का वातावरण बनाए रखने में सहायक माने जाते हैं.


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लेखक के बारे में

Published by: Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.
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