Aja Ekadashi 2026: भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को अजा एकादशी के रूप में मनाया जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से भगवान श्रीहरि विष्णु की पूजा करने से समस्त पापों का नाश होता है तथा जीवन में सुख-समृद्धि आती है. इस व्रत को करते समय कुछ विशेष नियमों का पालन करना आवश्यक है. कहते हैं कि सही विधि और नियमों के साथ किया गया व्रत शुभ फल प्रदान करता है.
अजा एकादशी पर क्या न करें?
- चावल का सेवन न करें: एकादशी तिथि पर चावल का सेवन करना अशुभ माना जाता है. इसलिए इस दिन चावल न खाएं.
- तुलसी पत्र न तोड़ें: एकादशी के दिन तुलसी के पौधे से पत्ते तोड़ना अशुभ माना जाता है. पूजा के लिए तुलसी दल एक दिन पहले यानी दशमी तिथि को तोड़कर रख लें.
- तामसिक भोजन से दूरी रखें: व्रत के दिन लहसुन, प्याज, मांस, मदिरा और अन्य तामसिक वस्तुओं का सेवन न करें.
- क्रोध और विवाद से बचें: व्रत के दिन मन में नकारात्मक विचार न लाएं, अपशब्द बोलने और किसी से झगड़ा करने से बचें. ऐसा करना शुभ नहीं माना जाता है.
- दिन में सोने से परहेज करें: एकादशी के दिन दोपहर में सोना शुभ नहीं माना जाता है. इस समय भगवान विष्णु का ध्यान, भजन और कीर्तन करना चाहिए.
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अजा एकादशी पर क्या करें?
- ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें. संभव हो तो स्नान के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाएं.
- श्रीहरि को तुलसी दल अर्पित करें: भगवान विष्णु को अर्पित किए जाने वाले भोग में तुलसी दल अवश्य शामिल करें.
- विष्णु मंत्रों का जाप करें: पूजा के समय 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' या 'ॐ नमो नारायणाय' मंत्र का यथासंभव जाप करें.
- व्रत कथा का श्रवण करें: शाम की पूजा के समय अजा एकादशी की पौराणिक व्रत कथा अवश्य सुनें या पढ़ें.
- दान-पुण्य करें: पूजा के पश्चात अपनी क्षमता के अनुसार गरीबों या जरूरतमंदों को अन्न, पीले वस्त्र, फल या धन का दान करें.
- पीले रंग के वस्त्र पहनें: मान्यता है कि पीला रंग भगवान विष्णु को प्रिय है. ऐसे में अजा एकादशी के दिन पीले रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है.
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