Adhik Masik Durgashtami 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मासिक दुर्गाष्टमी का पर्व मनाया जाता है. यह त्योहार मां आदिशक्ति दुर्गा को समर्पित है. ज्येष्ठ माह में यह पर्व आज 23 मई, शनिवार के दिन मनाया जा रहा है. साल 2026 में ज्येष्ठ मास में पुरुषोत्तम मास का दुर्लभ संयोग बना है, जिस कारण इस पर्व का महत्व और अधिक बढ़ गया है.
यह पावन समय आदि शक्ति मां दुर्गा की असीम कृपा प्राप्त करने और जीवन की समस्त नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करने का दुर्लभ अवसर माना जाता है. शास्त्रों के अनुसार, इस शुभ दिन पर यदि पूर्ण श्रद्धा और विधि-विधान के साथ मां भगवती के मंत्रों का जाप किया जाए, तो साधक को सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और शत्रुओं पर विजय का आशीर्वाद प्राप्त होता है.
1. दुर्गा बीज मंत्र
ॐ दुं दुर्गायै नमः।
महत्व: यह मां दुर्गा का सबसे मूल और शक्तिशाली बीज मंत्र माना जाता है. ‘दुं’ अक्षर में मां दुर्गा की संपूर्ण शक्तियां समाहित हैं. धार्मिक मान्यता है कि इस मंत्र का नियमित जाप करने से साधक के भीतर का भय समाप्त होता है और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है. कहा जाता है कि यदि जीवन में लगातार बाधाएं आ रही हों या कोई अज्ञात भय परेशान कर रहा हो, तो यह मंत्र साधक के चारों ओर नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा करने वाला सुरक्षा कवच बनाता है.
2. दुर्गा नवार्ण मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।
महत्व: नवार्ण का अर्थ है नौ अक्षरों वाला महामंत्र. यह श्री दुर्गा सप्तशती का मूल मंत्र माना जाता है, जिसमें महासरस्वती, महालक्ष्मी और महाकाली की संयुक्त ऊर्जा का वास होता है. इस मंत्र में ‘ऐं’ सरस्वती (ज्ञान), ‘ह्रीं’ लक्ष्मी (ऐश्वर्य) और ‘क्लीं’ काली (ऊर्जा और रक्षण) का प्रतीक है. इस मंत्र के नौ अक्षर नौ ग्रहों और मां दुर्गा के नौ स्वरूपों को समर्पित माने गए हैं. धार्मिक मान्यता है कि इसके जाप से कुंडली के ग्रह दोष शांत होते हैं और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है.
3. दुर्गा गायत्री मंत्र
ॐ गिरिजायै च विद्महे शिवप्रियायै च धीमहि।
तन्नो दुर्गा प्रचोदयात्॥
महत्व: बुद्धि की शुद्धता और दिव्य चेतना की जागृति के लिए दुर्गा गायत्री मंत्र का विशेष महत्व माना जाता है. ‘गिरिजा’ (पर्वतराज की पुत्री) और ‘शिवप्रिया’ स्वरूप में मां का ध्यान करने से चंचल मन शांत होता है. यह मंत्र साधक की बुद्धि को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करता है, जिससे जीवन में सही निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है.
4. दुर्गा स्तुति मंत्र
ॐ सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तुते॥
ॐ सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्तिसमन्विते।
भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोऽस्तुते॥
महत्व: यह मंत्र मां भगवती की सर्वव्यापकता और उनकी परम कृपालु शक्ति का वर्णन करता है. संपूर्ण जगत का कल्याण इसी स्तुति में निहित माना गया है. धार्मिक मान्यता है कि इस मंत्र का जाप करने से विवाह, गृह प्रवेश या व्यापार की शुरुआत जैसे रुके हुए मांगलिक कार्य बिना किसी विघ्न के पूर्ण होते हैं. मंत्र का दूसरा भाग प्रार्थना करता है कि “हे सर्वशक्तिशाली देवी, हमें हर प्रकार के भय और विपत्ति से बचाएं.” यह स्तुति मानसिक तनाव और भय को दूर करने में अत्यंत प्रभावी मानी जाती है.
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