Aaj Ka Panchang 17 June 2026: आज 17 जून 2026 दिन बुधवार है. महावीर पंचांग के अनुसार शुद्ध ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष तृतीया रात 01 बजकर 40 मिनट तक रहेगी, इसके बाद चतुर्थी तिथि आरम्भ हो जाएगी. आज सूर्योदय कालीन ग्रहों की स्थिति की बात करें तो चंद्रमा मिथुन राशि में दोपहर 12 बजकर 1 मिनट तक रहेंगे, इसके बाद कर्क राशि में प्रवेश करेंगे, जहां पर पहले से शुक्र और देव गुरु बृहस्पति मौजूद हैं. बुध मिथुन राशि में मौजूद हैं. सूर्य मिथुन राशि में विराजमान हैं. मंगल मेष राशि में स्थित हैं. शनि मीन राशि में मौजूद हैं. राहु कुंभ राशि में केतु सिंह राशि में विराजमान हैं.आइए जानते है ज्योतिषाचार्य एवं तंत्र विशेषज्ञ चंद्रशेखर सहस्रबाहु: से आज का पंचांग …
आज का पंचांग 17 जून 2026 दिन बुधवार
तिथि: अधिक ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष तृतीया रात 01 बजकर 40 मिनट तक, उपरांत चतुर्थी तिथि
श्री शुभ संवत: 2083
शाके: 1948
हिजरी सन: 1447-48
सूर्योदय: 04:58 AM
सूर्यास्त: 06:42 PM
सूर्योदय कालीन नक्षत्र: पुनर्वसु शाम 5 बजकर 38 मिनट तक उपरांत पुष्य, योग: व्याघात रात 10 बजकर 46 मिनट तक उपरांत घर्षण ,करण: तैतिल दोपहर 2 बजकर 32 मिनट तक उपरांत गर
सूर्योदय कालीन ग्रह विचार
सूर्य- मिथुन राशि
चंद्रमा- मिथुन राशि
मंगल- मेष राशि
बुध- मिथुन राशि
गुरु-कर्क राशि
शुक्र- कर्क राशि
शनि- मीन राशि
राहु-कुम्भ राशि
केतु-सिंह राशि
आज दिन का चौघड़िया (पटना)
लाभ – उन्नति: 04:58 Am से 06:41 Am
अमृत – सर्वोत्तम: 06:41 Am से 08:24 Am
काल – हानि: 08:24 Am से 10:07 Am
शुभ – उत्तम: 10:07 Am से 11:50 Am
रोग – अमंगल: 11:50 Am से 01:33 Pm
उद्वेग – अशुभ: 01:33 Pm से 03:16 Pm
चर – सामान्य: 03:16 Pm से 04:59 Pm
लाभ – उन्नति: 04:59 Pm से 06:42 Pm
आज का शुभ समय (मुहूर्त)
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 03:36 Am से 04:17 Am
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:08 Pm से 03:03 Pm
आज का अशुभ समय (मुहूर्त)
राहुकाल: दोपहर 11:50 Am से 01:33 Pm
यमगण्ड: सुबह 06:41 Am से 08:24 Am
गुलिक काल: सुबह 10:07 Am से 11:50 Am
उपाय
आज रंभा व्रत है. रंभा व्रत (जिसे रंभा तीज या रंभा तृतीया भी कहा जाता है) हिंदू धर्म में एक प्रमुख और विशेष व्रत है, जो मुख्य रूप से ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है. इस व्रत का उद्देश्य अखंड सौभाग्य, पति की लंबी आयु, वैवाहिक जीवन में खुशहाली और मनचाहा जीवनसाथी प्राप्त करना है. आज महिलाएं प्रात: स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करके सोलह श्रृंगार करती हैं. कई स्थानों पर इस दिन केले के पेड़ की भी पूजा करने की प्राचीन परंपरा है.
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