Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि 2026 की शुरुआत 19 मार्च 2026 से होने जा रही है. इस दौरान नौ दिनों तक माँ दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की विधिपूर्वक पूजा की जाती है. नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना की जाती है. घटस्थापना के समय मिट्टी में जौ बोने की परंपरा सदियों से चली आ रही है. इन उगते हुए जौ के दानों को ‘जवारे’ कहा जाता है. आइए जानते हैं कि इसका महत्व.
सृष्टि की पहली फसल का सम्मान
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब ब्रह्मा जी ने इस सृष्टि की रचना की थी, तब वनस्पतियों में सबसे पहली फसल जौ उगी थी. यही कारण है कि जौ को ‘पूर्ण धान्य’ माना जाता है. नवरात्रि के दौरान जौ बोकर हम सृष्टि के आरंभ का स्मरण करते हैं और अन्न के रूप में ब्रह्मा जी का सम्मान करते हैं.
अन्न में ब्रह्म का वास
हिंदू धर्म में अन्न को देवता माना गया है. शास्त्रों में कहा गया है – “अन्नं वै ब्रह्म”, यानी अन्न ही ब्रह्म है. नवरात्रि में जौ बोना इस बात का प्रतीक है कि हम अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि के लिए माँ दुर्गा और अन्न देवता का आशीर्वाद मांग रहे हैं.
जौ बोने की विधि
- एक मिट्टी या कांसे का पात्र लें.
- उसमें मिट्टी भरकर थोड़ा पानी डालें.
- जौ के दाने बुराई या बुरे विचारों को दूर करने के लिए बोएं.
- पात्र को घर के पूजा स्थल या साफ-सुथरे कोने में रखें.
- नवरात्रि के अंत तक इसे पानी देते रहें. जब जौ पूरी तरह हरा-भरा हो जाए, तब इसे माँ दुर्गा के चरणों में चढ़ा सकते हैं.
कलश स्थापना की विधि
- स्थान की शुद्धि: पूजा स्थल को साफ करें, गंगाजल छिड़कें और मिट्टी की वेदी या लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं.
- जौ बोना: मिट्टी के पात्र में साफ मिट्टी और जौ की परतें बिछाएं. इसे कलश के नीचे या बगल में रखें.
- कलश की तैयारी: तांबे या मिट्टी के कलश पर रोली से ‘स्वास्तिक’ बनाएं और गले में कलावा (मौली) बांधें.
- कलश में सामग्री: कलश में शुद्ध जल, गंगाजल, एक सिक्का, सुपारी, अक्षत, दूर्वा और हल्दी की गांठ डालें.
- पल्लव और नारियल: कलश के मुख पर आम या अशोक के 5-7 पत्ते रखें. नारियल को लाल कपड़े में लपेटकर कलश के ऊपर इस प्रकार रखें कि उसका मुख आपकी ओर हो.
- स्थापना: कलश को जौ वाले पात्र के बीच में स्थापित करें और देवी-देवताओं का आवाहन करें.
- अखंड ज्योति: कलश के दाईं ओर घी या तेल का दीपक जलाकर पूजन का संकल्प लें.
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