प्रेम के अस्तित्व को उकरेती है शशांक की कविता 'जब तुम रहती'

कवि शशांक की एक कविता 'जब तुम रहती' है. यह कविता बहुत ही महीन तरीके से प्रेम के अस्तित्व के उकेरती हुई दिखाई देती है. उनकी इस रचना में कवि का छायावाद और उनकी साफगोई साफ झलकती दिखाई देती है.

कवि शशांक की एक कविता ‘जब तुम रहती’ है. यह कविता बहुत ही महीन तरीके से प्रेम के अस्तित्व के उकेरती हुई दिखाई देती है. उनकी इस रचना में कवि का छायावाद और उनकी साफगोई साफ झलकती दिखाई देती है. बातों ही बातों में आसान लफ्जों उन्होंने कई गूढ़ इशारे भी किए हैं. शशांक ने इस कविता की रचना 23 जनवरी 2023 को की है. आइए, पढ़कर समझते हैं कवि और कविता को…

सदा नहीं रहती

तुम रहती

तो रहती

नहीं तो

नहीं रहती

मेरी मुस्कुराहटें

एवं

मेरा प्रेम

हम दोनों का

इस धरा पर

अस्तित्व

परछाइयां

पावों के चिन्ह

तथा

यात्रा

जब तुम रहती

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कोई नरम घोंसला

किसी कोयल का स्वर

शांत बहती नदी

गहरा नीला आकाश

इठलाता चंद्रमा

कृष्ण की बांसुरी

विस्तृत सागर

आंखों से झांकती शरारतें

छूने के लिए धीरे धीरे

मचलती अंगुलियां

बहुत कुछ कहते

बंद होठ

एवं

कहीं आसपास

रहता

टहलता

हमारा ईश्वर

जब तुम रहती

शशांक

23 जनवरी 2023

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लेखक के बारे में

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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