हमास चीफ याह्या सिनवार को इजरायल ने मारा, गला दबाकर हत्या करने में था माहिर

Yahya Ibrahim Hassan Sinwar : हमास चीफ इस्माइल हानिए की हत्या के बाद उसका उत्तराधिकारी बना याह्या सिनवार मारा गया है. इजरायली सैनिकों ने उसे एक रुटीन गश्त के दौरान मार गिराया. उसकी अंगुली को काटकर उसका डीएनए टेस्ट किया गया और फिर बताया गया कि सिनवार मारा गया. सिनवार एक साथ कई लोगों को मार दिया करता था, जिसकी वजह से उसे खान यूनिस का कसाई कहा जाता था. खान यूनिस गाजा में रिफ्यूजी कैंप है. पढ़ें, सिनवार के आतंक की पूरी कहानी.

Yahya Ibrahim Hassan Sinwar : अपने दुश्मनों को चुन-चुनकर मारने का दावा करने वाले इजरायल ने एक बार फिर बड़ी सफलता हासिल की है. हमास चीफ इस्माइल हानिये को ईरान में घुसकर मारने के बाद इजरायल ने उसके उत्तराधिकारी याह्या सिनवार की भी हत्या कर दी है. चूंकि याह्या इब्राहिम हसन सिनवार को मारने के लिए इजरायल ने कोई खास ऑपरेशन नहीं चलाया इसलिए जब सिनवार का शव बरामद हुआ तो इजयराल ने काफी जांच की और उसके बाद ही गुरुवार को यह घोषणा की कि उसने अपने एक और दुश्मन याह्या सिनवार को मार गिराया है. सिनवार को हानिए की मौत के बाद अगस्त में हमास का चीफ बनाया गया था. इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सिनवार की मौत पर कहा है कि शैतान को बहुत बड़ी क्षति हुई है, लेकिन अभी युद्ध समाप्त नहीं हुआ है.

कैसे मारा गया याह्या सिनवार

हमास चीफ याह्या सिनवार को रूटीन गश्त के दौरान इजरायली सैनिकों ने मार गिराया. उसे मारने के लिए अलग से कोई खास आॅपरेशन नहीं चलाया गया था. इजरायली सैनिकों ने दक्षिणी गाजा के राफा में सिनवार को मार गिराया. इस गश्ती के दौरान तीन हमास आतंकवादियों को इजरायल ने मार गिराया, सिनवार का शव जब मिला तो उसकी अंगुली काटकर पहले उसकी डीएनए जांच की गई और तब यह पता चला कि सिनवार मारा गया. इजरायल ने बताया है कि वह एक कमांडर की मौत नहीं मरा, बल्कि वह एक आदमी की तरह मरा, जिसे सिर्फ अपनी चिंता थी.  याह्या सिनवार की तलाश इजरायली सेना 7 अक्टूबर 2023 से ही कर रही थी. इस मनहूस दिन हमास ने इजरायल पर बड़ा हमला किया था और उसके 1200 सैनिकों को मार गिराया था. सैकड़ों महिलाओं और बच्चों को भी उठाकर ले गए, जिनकी अबतक रिहाई नहीं हो पाई है, जबकि वे गाजापट्टी के सुरंगों में ही हैं. 

गश्ती के दौरान तीन आतंकवादियों को इजरायली ने भागते हुए देखा और उन्हें ललकारा, जिसके बाद मुठभेड़ हुई. मुठभेड़ के बाद तीन आतंकियों का शव मिला जिनमें से एक सिनवार की तरह दिख रहा था. सैनिकों ने उसकी अंगुली काटकर जांच के लिए भेजा. उसका डीएनए परीक्षण हुआ, जिसके बाद इजरायल ने उसके मारे जाने की घोषणा की.

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खान यूनिस का कसाई याह्या सिनवार 

याह्या सिनवार को खान यूनिस का कसाई के नाम से जाना जाता है. उसने 1988 में एक साथ 12 फिलिस्तीनियों और दो इजरायली सैनिकों को मार दिया था, क्योंकि उन्होंने इजरायल की मदद की थी, इसी वजह से उसे खान यूनिस का कसाई के नाम से जाना जाता था. इस मामले में उसे इजरायल ने गिरफ्तार कर लिया था और वर्षों वह इजरायल की जेल में भी रहा था. जेल में रहते हुए भी उसने कुछ मुखबिरों की हत्या गला घोंटकर कर दी थी और उनका सिर सेल से बाहर फेंकवा दिया था. उसने जेल में सुरंग बनाकर भी कई बार भागने की कोशिश की थी. उसे अक्टूबर 2023 में इजरायल पर हुए हमले का मास्टर माइंड माना जाता है.

शरणार्थी शिविर में जन्मा था खौफनाक सिनवार 

याह्या सिनवार का जन्म 1962 में दक्षिणी गाजा के रिफ्यूजी कैंप में हुआ था. उनके माता-पिता को इजरायल से युद्ध के दौरान अश्कलोन से निकाल दिया गया था. सिनवार की पढ़ाई इस्लामिक यूनिवर्सिटी और गाजा से हुई थी. उसने यहीं पर अरबी भाषा में स्नातक की डिग्री ली. वह जेल में रहने के दौरान हिब्रू भी पढ़ा था. इजरायल की जेल से रिहा होने के बाद वह हमास के संपर्क में आया और उनके लिए काम किया और उनका मुखिया तक बना. सबसे पहले वह 1982 में जेल गया था और उसके बाद से उसने खुद को फिलिस्तीन के लिए समर्पित कर दिया था. 2023 के हमले के बाद से ही इजरायल हमास के साथ युद्ध कर रहा है और हमास को उनके किए की सजा देने दावा कर रहा है.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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