तमिलनाडु में द्रविड़ पहचान की पार्टियां ही करेंगी राज या फिर राष्ट्रीय पहचान का नैरेटिव होगा सेट?

Tamil Nadu Election Results : तमिलनाडु एक ऐसा राज्य है जहां द्रविड़ पहचान से निकली पार्टियां ही राज करती आई हैं, लेकिन इस बार प्रदेश की राजनीति में हलचल है. बीजेपी इस कोशिश में है कि वह अपने दम पर सीट जीते, इसके लिए उसे अपना वोट बैंक 15 प्रतिशत तक लेकर जाना होगा, जो अबतक 10 प्रतिशत के ऊपर नहीं जा पाया है. सोमवार को जब ईवीएम खुलेंगे, तो सारा दृश्य स्पष्ट होगा और यह भी कि जनता ने किसे स्वीकार और किसे नकारा.

Tamil Nadu Election Results : तमिलनाडु की राजनीति इस बार किस करवट बैठेगी, यह एक बड़ा सवाल है, जो लोगों के मन में है. तमिलनाडु में अबतक जो राजनीति होती आई है उसमें डीएमके और एआईएडीएमके का वर्चस्व रहा है. इन दोनों के बीच ही सत्ता बदलती रही है, जिसे बायपोलर पॉलिटिक्स कहा जाता है,लेकिन इस बार सिनारियो कुछ और है. इसकी बड़ी वजह है तमिलनाडु में बीजेपी और अभिनेता से नेता बने विजय की एंट्री.1967 के बाद से तमिलनाडु में द्रविड़ पहचान से इतर कोई पार्टी नहीं जीत पाई है.

तमिलनाडु में हैं कुल 234 विधानसभा सीटें

तमिलनाडु में कुल 234 विधानसभा सीटें हैं और अभी यहां एमके स्टालिन के नेतृत्व में डीएमके की सरकार है. डीएमके के गठबंधन को एसपीए कहा जाता है और इनकी कुल सीटें 159 हैं. डीएमके के पास ओबीसी का मजबूत वोट बैंक है और वे द्रविड़ पहचान से खुद को खासा कनेक्ट रखती हैं. एआईएडीएमके विपक्ष में है, इनका बीजेपी के साथ गठजोड़ है,लेकिन जयललिता के निधन के बाद से यह पार्टी मजबूत नेतृत्व के लिए संघर्ष कर रही है और एक तरह से बिखरी हुई है. 2021 के चुनाव में एनडीए को महज 75 सीटें मिली थीं, जबकि यहां बहुमत का जादुई आंकड़ा 118 का है.

बीजेपी ने किया नेशनल नैरेटिव सेट

तमिलनाडु के चुनाव में अपनी एंट्री कराने के लिए बीजेपी ने द्रविड़ बनाम राष्ट्रीय पहचान का नैरेटिव सेट करने की कोशिश की है. बीजेपी हिंदुत्व और विकास के माॅडल को प्रमोट कर रही है. नेशनल नैरेटिव के लिए ही सीपी राधाकृष्णन को बीजेपी ने देश का उपराष्ट्रपति भी बनाया है. पीएम मोदी उनके यहां पूजा के लिए भी गए थे. प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह ने यहां कई सभाएं भी की हैं, जिसका प्रभाव यह हो रहा है कि प्रदेश में डीएमके और बीजेपी के बीच जंग दिखने लगी है, जो बीजेपी की बड़ी उपलब्धि है क्योंकि बीजेपी की स्वीकार्यता तमिलनाडु में ना के बराबर रही है.

अभिनेता से नेता बने विजय की एंट्री

अभिनेता से नेता बने विजय ने आम लोगों के मुद्दों को उठाकर तमिलनाडु की राजनीति में एंट्री मारी है. वे सिस्टम बदलने की बात कर रहे हैं. उनका जबरदस्त फैन बेस है और तमिलनाडु की राजनीति में एआईएडीएमके के संस्थापक एमजीआर और फिर जे जयललिता इस बात के बेहतरीन उदाहरण है कि एक्टर या एक्ट्रेस राजनीति में सफल हो सकते हैं. हालांकि विजय कितने कारगर होंगे यह अभी से बता पाना मुश्किल है. उनके पास राजनीति का अनुभव नहीं है,लेकिन उनकी लोकप्रियता बहुत अधिक है. एग्जिट पोल यह दावा कर रहे हैं कि विजय की पार्टी तमिलगा वेत्त्री कजगम(टीवीके) बड़ा हाथ मार सकती है और उसे 100 से ज्यादा सीटें भी मिल सकती हैं. हालांकि अभी से इस बारे में कुछ कहना मुश्किल है, लेकिन यह बात तो दिख रही है कि कि विजय एआईएडीएमके की सीटें अपनी ओर कर सकते हैं. अगर वे राजनीति में सक्रिय रहे, तो उनका भविष्य उज्ज्वल है.

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By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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