Siddaramaiah : कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने 28 मई को अपना इस्तीफा दे दिया. इस इस्तीफे के साथ ही प्रदेश में नेतृत्व का संघर्ष समाप्त हो गया है. सिद्धारमैया के इस्तीफे के बाद कर्नाटक में डीके शिवकुमार ने कमान संभाल ली है. सिद्धारमैया को हटाए जाने से उनके समर्थकों में आक्रोश है और वे इसके लिए राहुल गांधी को जिम्मेदार मानते हैं. कांग्रेस नेतृत्व ने संगठनात्मक संकट तो टाल दिया है, लेकिन अब उसकी सबसे बड़ी चुनौती यह है कि सिद्धारमैया की लोकप्रियता, उनके सामाजिक गठबंधन और राहुल गांधी की सामाजिक न्याय वाली राजनीति के बीच संतुलन कैसे बनाए रखा जाए.
हाईकमान ने सिद्धारमैया से इस्तीफा क्यों मांगा?
2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी को बड़ी जीत मिली. इस जीत का श्रेय कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार को दिया जाता है. इसी वजह से चुनाव के बाद उनके समर्थकों को उम्मीद थी कि डीके शिवकुमार ही प्रदेश के मुख्यमंत्री होंगे,लेकिन उस वक्त पार्टी नेतृत्व ने सिद्धारमैया को कमान सौंपी. उसके बाद से ही वहां सत्ता का संघर्ष कायम था. डीके शिवकुमार उपमुख्यमंत्री तो बन गए, लेकिन उनकी नजर सीएम की कुर्सी पर बराबर बनी रही. इस वजह से पार्टी नेतृत्व पर एक तरह का दबाव बना रहता था कि वे डीके शिवकुमार को सीएम की कुर्सी सौंपे. ऐसी चर्चाएं भी होती रही थीं कि सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच सीएम की कुर्सी ढाई-ढाई साल के लिए बंटी हुई है. सिद्धारमैया का इस्तीफा इसी शक्ति संतुलन को बनाये रखने का प्रयास है.
कांग्रेस पार्टी को क्यों होगा नुकसान?
सिद्धारमैया कर्नाटक में कांग्रेस के सबसे लोकप्रिय नेताओं में से एक हैं. उनका बड़ा जनाधार है. सिद्धारमैया कुरुबा समुदाय से आते हैं, जो कर्नाटक का एक प्रभावशाली पिछड़ा वर्ग है.सिद्धारमैया के बारे में यह कहा जाता है कि उन्होंने अल्पसंख्यक, पिछड़ों और दलितों को जोड़कर एक खास तरह का समीकरण बनाया था, जिसने प्रदेश में कांग्रेस को जीत दिलाई, क्योंकि उनका जनाधार बहुत मजबूत है. अब जबकि सिद्धारमैया से सत्ता छिन गई है, उनके वोट बैंक में असंतोष है, इसका असर 2028 के चुनाव में दिख सकता है और संभव है कि बीजेपी की तरह कांग्रेस भी चुनाव हार जाए. हालांकि पूरा ओबीसी वोटबैंक कांग्रेस के पाले से खिसक जाएगा, ऐसा भी नहीं कहा जा सकता है, लेकिन कुछ प्रतिशत वोट के खिसकने से हार-जीत हो जाती है, यह भी एक सच्चाई है. सिद्धारमैया के इस्तीफे से पिछड़ों में यह बात घर कर गई है कि कांग्रेस ने अन्याय किया है. कई जगह पर कुरुबा समुदाय के नेताओं ने प्रदर्शन भी किया है.
राहुल गांधी की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा?
राहुल गांधी की छवि पर असर
राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी हमेशा सामाजिक न्याय की बात करते रहे हैं, जिससे उनकी छवि पिछड़ों और दलितों की हितैषी के रूप में रही है. सिद्धारमैया के इस्तीफे से राहुल गांधी की छवि पर असर पड़ा है, पिछड़ा वर्ग उन्हें अपने विरोधी के रूप में देख रहा है, जो उनकी छवि पर असर डाल रहा है और उनपर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप लगा रहा है. डीके शिवकुमार वोक्कालिगा समुदाय से हैं, जो प्रभावशाली है और अन्य पिछड़ा वर्ग में ही आती है. संभव है कि वे इस समुदाय को अपने साथ जोड़कर रख पाएं और पार्टी को नुकसान होने से बचा पाएं.
ये भी पढ़ें :डीके शिवकुमार को विधायक दल का नेता चुना गया, होंगे प्रदेश के अगले मुख्यमंत्री
