Nimisha Priya : ब्लडमनी भी नहीं रोक पा रही निमिषा की फांसी, पीड़ित परिवार कर रहा शरिया कानून Qisas की मांग

Nimisha Priya Latest News : निमिषा प्रिया यमन में अपना क्लिनिक चलाती थीं और पेशे से एक नर्स थी. उसके साझेदार तलाल अब्दो महदी ने उसे धोखा दिया और बिजनेस में हिस्सेदारी देने से मना कर दिया था. विवाद इतना बढ़ा कि निमिषा किसी तरह यमन से निकलना चाहती थी और इसी चाहत में उसने तलाल को बेहोशी का इंजेक्शन दिया, ताकि वह उसके पास से अपना पासपोर्ट और अन्य कागजात ले सके, लेकिन दवाई के ओवरडोज से तलाल की मौत हो गई और निमिषा प्रिया पहुंच गई जेल और अंतत: फांसी की सजा मुकर्रर हुई.

Nimisha Priya Latest News : यमन में केरल की नर्स निमिषा प्रिया की फांसी टल तो गई है, लेकिन अभी यह दावे के साथ नहीं कहा जा सकता है कि उसे फांसी नहीं होगी और उसका जीवन सुरक्षित है. निमिषा प्रिया की फांसी टलने की सूचना मंगलवार 15 जुलाई को आ गई थी, लेकिन अभी उसके बिजनेस पार्टनर तलाल अब्दो महदी के परिवार ने ना तो उसे माफ किया है और ना ही उसके साथ किसी तरह की डील की है, जिसके आधार पर यह कहा जा सके कि निमिषा प्रिया अब सुरक्षित है.

कुछ वक्त के टली है निमिषा प्रिया की फांसी

निमिषा प्रिया को फांसी 16 जुलाई को होनी थी, लेकिन भारत सरकार के कूटनीतिक प्रयासों और धार्मिक संगठनों की अपीलों की वजह से निमिषा प्रिया की फांसी कुछ वक्त के लिए टल गई है, लेकिन कब तक वह फांसी से बच पाएगी यह अभी कह पाना मुश्किल है. भारत के मुफ्ती शेख कंथापुरम एपी अबूबकर मुसलियार ने यमनी अधिकारियों से यह आग्रह किया है कि वे पीड़ित परिवार से बात करें और इस्लामिक कानून के अनुसार निमिषा प्रिया को माफी दिलवा दें. मुफ्ती शेख ने यह अपील राष्ट्रीयता की जिम्मेदारी के तौर पर की है. चूंकि यमन में भारतीय दूतावास काम नहीं कर रहा है, इसलिए राष्ट्र के लिए उन्होंने यह अपील की है. मुफ्ती शेख ने यमन के धर्म गुरुओं से संपर्क किया है और उनसे मामले की जांच करने और निमिषा को फांसी से बचाने की अपील की है.

तलाल अब्दो महदी का परिवार ब्लडमनी लेने के मूड में नहीं

शरिया कानून के अनुसार तलाल अब्दो महदी की फांसी तब ही रूक सकती है जब पीड़िता परिवार ब्लडमनी यानी एक तरह से मुआवजे की बड़ी रकम लेकर उसे माफ कर दे. लेकिन तलाल महदी का परिवार इस बात पर राजी नहीं है. बीबीसी न्यूज के अनुसार वे यह कह रहे हैं कि उन्हें ब्लडमनी नहीं किसास चाहिए. शरिया कानून में किसास (Qisas) का अर्थ है जैसे को तैसा. यह कानून यह कहता है कि जिसने जैसा किया है उसके अनुसार उसे सजा दी जानी चाहिए. तलाल के भाई अब्देल फतेह का कहना है कि निमिषा का अपराध अक्षम्य है, विवाद चाहे कुछ भी रहा हो, निमिषा ने जिस तरह उसके शव के टुकड़े-टुकड़े करके उसे छिपाया वह कतई माफी योग्य नहीं है.

क्या होगा निमिषा प्रिया का भविष्य

अभी के हालात पर नजर डालें तो निमिषा का भविष्य अनिश्चित है. भारतीय धर्म गुरु कोशिश कर रहे हैं कि निमिषा को फांसी ना हो, लेकिन सबकुछ तलाल अब्दो महदी के परिजनों के हाथों में है. उनसे बातचीत की कोशिश तो हो रही है, लेकिन वो मानेगा या नहीं यह अभी से बता पाना मुश्किल है. इन हालात में निमिषा को फांसी होगी या माफी मिलेगी यह बता पाना मुश्किल है, सबकुछ वक्त के हाथों में है.

निमिषा प्रिया को 2020 में तलाल अब्दो महदी नामक व्यक्ति के हत्या के जुर्म में फांसी की सजा सुनाई गई थी. यह फैसला निचली अदालत का था.निमिषा प्रिया एक मजदूर परिवार से संबंध रखती हैं. नौकरी के लिए उसने नर्सिंग की ट्रेनिंग ली और 2008 में यमन चली गईं. 2011 में उसने टाॅमी थाॅमस से शादी कर ली और वे कैपिटल सिटी सना लौट गए, जहां उनकी एक बेटी हुई. इसके बाद आय बढ़ाने के लिए निमिषा प्रिया ने तलाल अब्दो के साथ एक क्लिनिक खोला था.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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