Mamata Banerjee TMC : टीएमसी में फूट पर पश्चिम बंगाल के कैबिनेट मंत्री दिलीप घोष ने कहा कि हमने पहले भी कहा था कि जिस दिन टीएमसी चुनाव में हारेगी, पार्टी खत्म हो जाएगी. यह पार्टी सिर्फ करप्शन पर बनी है. पार्टी में अभी जो कुछ हो रहा है वह तो होना ही था. हमारे पास बहुत सारे एप्लीकेशन आ रहे हैं, लेकिन हमारे दरवाजे बंद हैं. हमें पता था कि ऐसा होने वाला है, इसलिए हमने दरवाजे कसकर बंद कर दिए हैं. देखते हैं आगे क्या होता है. बीजेपी के नेता का यह बयान काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि उनके इस बयान में टीएमसी का भविष्य तो नजर आ ही रहा है, साथ ही बंगाल की राजनीति किस ओर जाएगी यह भी दिख रहा है.
संकट का सामना कर रही हैं ममता बनर्जी और टीएमसी
अमूमन जैसा होता है, बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद ममता बनर्जी और उनकी पार्टी टीएमसी दोनों ही बड़ी चुनौतियों का सामना कर रही हैं. पार्टी के अंदर बगावत के सुर तेज होते जा रहे हैं. दो मेयर अभी तक पद छोड़ चुके हैं और पार्टी के अंदर यह बात तेज हो गई है कि वे उन्हें अभिषेक बनर्जी की लीडरशिप मंजूर नहीं है. पार्टी में ममता बनर्जी की लीडरशिप पर तो सवाल नहीं उठ रहे हैं, लेकिन अभिषेक बनर्जी को पसंद नहीं किया जा रहा है.
कहां से हुई संकट की शुरुआत
विधानसभा चुनाव में हार के बाद टीएमसी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है. पार्टी को सबसे बड़ा झटका तब लगा जब 58 विधायकों के एक समूह ने ऋतब्रता बनर्जी के नेतृत्व में पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. बागी गुट ने अपने नेता को विपक्ष का नेता बनाने की अपील की जिसे विधानसभा अध्यक्ष ने मंजूर भी कर लिया है और इस गुट को मुख्य विपक्षी पार्टी के रूप में मान्यता भी दे दी है. गौर करने वाली बात यह है कि इस गुट ने खुद को टीएमसी ही बताया है, लेकिन यह गुट मौजूदा नेतृत्व के खिलाफ खड़ा है. उनका आरोप है कि पार्टी के अंदर लोकतांत्रिक प्रक्रियाएं कमजोर हो गई हैं और कुछ लोग अपनी मनमानी कर रहे हैं.
ममता बनर्जी के प्रति सम्मान अभिषेक पर निशाना
बागी विधायकों का यह कहना है कि ममता बनर्जी अब भी उनकी नेता है, लेकिन वे पार्टी में अभिषेक बनर्जी की भूमिका को स्वीकार नहीं करना चाहते हैं. उनका यह मानना है कि पार्टी के पूरे संगठनात्मक व्यवस्था में बदलाव की जरूरत है. बागी गुट ममता बनर्जी को अब मार्गदर्शक की भूमिका में देखना चाहता है. दरअसल यह पार्टी के भीतर चल रहे नेतृत्व और उत्तराधिकार की जंग है, क्योंकि अभिषेक बनर्जी ममता दीदी के उत्तराधिकारी बनना चाहते हैं और ऋतब्रता बनर्जी जैसे लोगों को यह स्वीकार्य नहीं है.
फिरहाद हकीम और कृष्ण चक्रवर्ती का इस्तीफा
कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम टीएमसी के सबसे प्रभावशाली मुस्लिम नेताओं और ममता बनर्जी के भरोसेमंद सहयोगियों में गिने जाते हैं. उनके इस्तीफे के बाद यह चर्चा आम हो गई है कि पार्टी के शीर्ष पदों पर भी एका नहीं है और उनके बीच विवाद है. इस स्थिति ने पार्टी के भीतर अस्थिरता की भावना को और बढ़ा दिया है. फिरहाद हकीम के बाद बिधाननगर नगर निगम की मेयर कृष्णा चक्रवर्ती ने भी इस्तीफा देने की घोषणा कर दी. इस इस्तीफों ने यह साफ कर दिया है कि पार्टी संक्रमण काल से गुजर रही है और बड़ा बदलाव जल्द नजर आएगा.
बंगाल में आगे क्या होगा?
बंगाल में और टीएमसी की राजनीति में जो कुछ चल रहा है, उसे देखते हुए यह कहा जा सकता है कि पार्टी में बड़ा बदलाव होगा. सत्ता से बाहर होने के बाद ममता बनर्जी के सामने यह चुनौती सबसे बड़ी है कि वे अपनी पार्टी को एकजुट रखें. बीजेपी के लिए यह अवसर है क्योंकि विपक्ष आपस में उलझा रहेगा तो उसे रोकने वाला कोई नहीं होगा. इसी वजह से वह वेट एंट वाॅच की मुद्रा में है और एक तरह से मजे ले रही है, लेकिन ममता बनर्जी के लिए यह संक्रमण काल बड़ी चुनौतियां लेकर आया है.
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