Lancet Countdown SIDS Report: जलवायु परिवर्तन (Climate Change) का प्रभाव पूरी दुनिया पर पड़ रहा है, लेकिन इसके सबसे बड़े शिकार बन रहे हैं छोटे विकासशील द्वीप देश, जिन्हें संक्षेप में SIDS कहा जाता है. ‘लांसेट काउंटडाउन एसआईडीएस रिपोर्ट’ (Lancet Countdown SIDS Report) में इसका खुलासा हुआ है. इसमें कहा गया है कि इन द्वीप देशों में रहने वाले लोगों ने कोई गुनाह नहीं किया, फिर भी जलवायु परिवर्तन से संबंधित स्वास्थ्य समस्या झेलने को मजबूर हैं.
अत्यधिक गर्मी और हीटवेव का कहर
रिपोर्ट के अनुसार, लगातार बढ़ते तापमान की वजह से इन द्वीप देशों में छोटे बच्चे और बुजुर्ग सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं. एसआईडीएस देशों में 2000 के दशक की शुरुआत की तुलना में नवजात और छोटे बच्चे 7 गुणा अधिक हीटवेव (Heatwave) वाले दिनों का सामना कर रहे हैं. बुजुर्ग आबादी (Older Adults) के लिए यह आंकड़ा 5 गुणा अधिक हो गया है.
हीट स्ट्रेस और काम के घंटों का नुकसान
वर्ष 2004 में परिवेश के तापमान (Ambient Heat) ने हल्की बाहरी कसरत के दौरान मध्यम स्तर के हीट स्ट्रेस की वजह से औसतन 3000 घंटे बर्बाद कर दिये. इसी वर्ष भीषण गर्मी और अत्यधिक तापमान की वजह से करीब 4.4 अरब कार्य घंटे नष्ट हुए. वर्ष 1990 (जब से इस डेटा को ट्रैक करना शुरू किया गया है) से यह किसी एक वर्ष में संभावित नुकसान का सबसे बड़ा आंकड़ा है.
बीमारियों का खतरा और खाद्य असुरक्षा
जलवायु परिवर्तन केवल तापमान के बढ़ने तक सीमित नहीं है. यह बीमारियों और भुखमरी को भी सीधे तौर पर बढ़ावा दे रहा है.
- मच्छर जनित बीमारियां : लगातार गर्म होते मौसम के कारण डेंगू (Dengue), चिकनगुनिया (Chikungunya) और अन्य मच्छर जनित तथा जलवायु-संवेदनशील बीमारियों का जोखिम बेहद तेजी से बढ़ा है.
- सूखे से बढ़ता संकट : लंबे समय तक पड़े सूखे के कारण अतिरिक्त 2.7 मिलियन (27 लाख) लोग मध्यम से गंभीर स्तर की खाद्य असुरक्षा (Food Insecurity) का सामना कर रहे हैं.
- समुद्र पर असर : महासागरों के गर्म होने (Ocean Warming) से तटवर्ती इलाकों में मछली पालन, लोगों की आजीविका और समुद्री खाद्य सुरक्षा खतरे में पड़ दिख रही है. 1981-2010 की आधारभूत अवधि (Baseline Period) की तुलना में वर्ष 2022-2024 के औसत में SIDS के तटीय क्षेत्रों के समुद्र की सतह के तापमान में 0.61 डिग्री सेंटीग्रेड की वृद्धि दर्ज की गयी है.
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बुनियादी ढांचे और अंतरराष्ट्रीय वित्त पोषण की कमी
बढ़ते संकटों के बावजूद, अनुकूलन प्रयासों (Adaptation Efforts) में संस्थागत क्षमता की सीमा, बिखरा हुआ जलवायु वित्त (Climate Funding) और स्वास्थ्य अनुकूलन (Health Adaptation) में अपर्याप्त निवेश सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है. कुल 58 SIDS देशों में से केवल 10 देशों के पास समर्पित राष्ट्रीय स्वास्थ्य और जलवायु अनुकूलन योजनाएं (Dedicated National Health and Climate Adaptation Plans) हैं.
निगरानी का अभाव, कर्ज का बढ़ता बोझ
आधे से भी कम स्वास्थ्य प्रणालियां जलवायु की निगरानी (Climate Monitoring) में सक्रिय रूप से जुड़ी हुई हैं. SIDS को उपलब्ध अंतर्राष्ट्रीय जलवायु वित्त पोषण (International Climate Finance Funding) स्वास्थ्य की रक्षा के लिए आवश्यक राशि से काफी कम है. ऋण पर बढ़ती निर्भरता के कारण ये देश आर्थिक रूप से कमजोर होते जा रहे हैं. लगातार कर्ज का बोझ बढ़ रहा है. हालात यह है कि इनकी लगभग आधी वित्तीय आवश्यकताओं का अब तक आकलन भी नहीं किया जा सका है.
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उम्मीद की किरण : सौर ऊर्जा और जलवायु कूटनीति में प्रगति
तमाम विषम परिस्थितियों के बावजूद, रिपोर्ट कुछ सकारात्मक पहलुओं और मजबूत तैयारियों की ओर भी इशारा करती है. वर्ष 2020 के बाद से इन देशों में सौर फोटोवोल्टिक क्षमता (Solar Photovoltaic Capacity) दोगुनी से अधिक हो गयी है.
- प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली : अर्ली वॉर्निंग सिस्टम (Early Warning Systems) में सुधार हुआ है, जिसकी वजह से चरम मौसमी घटनाओं (Extreme Weather Events) से होने वाली मौतों में गिरावट आयी है, जो बेहतर तैयारी को दर्शाता है.
- जलवायु कूटनीति में नेतृत्व : SIDS देशों ने वैश्विक जलवायु कूटनीति में अपना नेतृत्व कायम रखा है. जलवायु परिवर्तन से संबंधित राज्यों के दायित्वों पर अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) का हाल ही में आया ऐतिहासिक सलाहकार फैसला इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है.
वैश्विक समुदाय से अपील
जैसे-जैसे दुनिया प्री-कॉप (Pre-COP) और फिर COP31 सम्मेलन की ओर बढ़ रही है, लाखों लोगों का स्वास्थ्य और कल्याण दांव पर लगा है. लांसेट की रिपोर्ट सरकारों से अपील करती है कि वे वित्तीय निवेश बढ़ाएं, जवाबदेही तय करें और स्थानीय स्तर पर संचालित समाधानों का समर्थन करें, ताकि ये छोटे द्वीप देश अपने लिए एक स्वस्थ और जलवायु-अनुकूल भविष्य का निर्माण कर सकें.
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