Nimisha Priya : क्या केरल की नर्स निमिषा प्रिया की फांसी टलेगी, 16 जुलाई को यमन में मिलनी है सजा

Kerala Nurse Nimisha Priya : पैसे की चाहत में केरल की नर्स निमिषा प्रिया ने यमन में अपना क्लिनिक खोला, लेकिन उसके पार्टनर ने उसे धोखा दे दिया. उसका शारीरिक शोषण किया और उसका पासपोर्ट भी जब्त करके रख लिया. इस मुसीबत से निकलकर देश वापस आने की चाहत में निमिषा से अपने पार्टनर तलाल अब्दो को बेहोशी का इंजेक्शन दिया, ताकि वह अपना पासपोर्ट और जरूरी कागजात ले सके, लेकिन दवाई के ओवरडोज से तलाल अब्दो की मौत हो गई और निमिषा को जेल हो गई. 16 जुलाई को उसे फांसी होना है, कोशिश हो रही है कि निमिषा की जान बच जाए, क्योंकि वह अपने पार्टनर को मारना नहीं चाहती थी बस उसके चंगुल से निकलना चाहती थी.

Kerala Nurse Nimisha Priya : केरल की रहने वाली नर्स निमिषा प्रिया को 16 जुलाई को यमन में फांसी होना है. उसकी फांसी को रोकने के लिए मामला काफी समय से गरमाया हुआ है, लेकिन अबतक ऐसा कुछ भी ठोस नहीं हुआ है, जिसके आधार पर यह कहा जा सके कि निमिषा को फांसी नहीं होगी. निमिषा का परिवार देश में परेशान हैं, वे चाहते हैं कि निमिषा को फांसी ना हो. यहां गौर करने वाली बात यह है कि निमिषा प्रिया पर हत्या का जुर्म साबित हुआ है जिसकी वजह से उसे फांसी दी जा रही है.

2008 में निमिषा प्रिया यमन गई थी

निमिषा प्रिया को 2020 में तलाल अब्दो महदी नामक व्यक्ति के हत्या के जुर्म में फांसी की सजा सुनाई गई थी. यह फैसला निचली अदालत का था, लेकिन शीर्ष अदालतों ने उसकी अपील पर गौर नहीं किया और अंतत: निमिषा प्रिया की फांसी की तारीख करीब आ गई है. निमिषा प्रिया हत्या की दोषी है, इसलिए हमें जानना चाहिए कि आखिर क्यों और कैसे निमिषा ने एक व्यक्ति की हत्या की. निमिषा प्रिया एक मजदूर परिवार से संबंध रखती हैं. नौकरी के लिए उसने नर्सिंग की ट्रेनिंग ली और 2008 में यमन चली गईं. केरल से बड़ी संख्या में लड़कियां नर्स की नौकरी करने के लिए यमन,कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, ओमान, बहरीन और कुवैत जैसे देशों में जाती हैं. जहां उन्हें बेहतर वेतन और सुविधाएं मिलती हैं.इसी चाहत में 2008 में निमिषा प्रिया यमन गई थीं. 2011 में उसने टाॅमी थाॅमस से शादी कर ली और वे कैपिटल सिटी सना लौट गए, जहां उनकी एक बेटी हुई.

निमिषा प्रिया ने किसकी हत्या की और क्यों की?

निमिषा और थाॅमस की इनकम नहीं बढ़ पा रही थी, जिसकी वजह से उन्होंने अपना क्लिनिक खोलने का सोचा और एक क्लिनिक खोला. यमन के कानून के हिसाब से वहां कोई बिजनेस करने के लिए स्थानीय व्यक्ति का साझेदार होना जरूरी है, कोई बाहरी व्यक्ति वहां अपना बिजनेस नहीं कर सकता है. इसी वजह से निमिषा प्रिया ने तलाल अब्दो महदी को अपना साझेदार बनाया. इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार निमिषा के नए क्लिनिक से उसके पुराने मालिक, जिस क्लिनिक में वो काम करती थी, उसे बहुत परेशानी थी. उसने तलाल अब्दो को बाध्य किया कि नए क्लिनिक के एग्रीमेंट में उसे हिस्सेदारी मिले, जिसके निमिषा के पुराने मालिक को 33 प्रतिशत और तलाल अब्दो को 67 प्रतिशत हिस्सेदारी पर एग्रीमेंट हुआ. तलाल अब्दो निमिषा का पुरान परिचित था, वो जिस क्लिनिक में काम करती थी वहीं पर तलाल भी काम करता था. उन लोगों के बीच अच्छे संबंध थे, तलाल अब्दो 2015 में उनके साथ भारत भी आया था. परेशानी तब खड़ी हुई जब तलाल ने निमिषा को क्लिनिक की आय में से पैसा देना बंद कर दिया. जब निमिषा ने अपने हिस्से का आय मांगा, तो उसने उसके साथ प्रताड़ना शुरू की. वह उसे शारीरिक रूप से भी प्रताड़ित करने लगा. इतना ही नहीं उसने एक फर्जी मैरिज सर्टिफिकेट कोर्ट में पेश करके यह साबित भी कर दिया कि दोनों की शादी हो चुकी है. उसने निमिषा का पासपोर्ट और अन्य जरूरी कागजात भी अपने पास जब्त करके रखे थे. इस वजह से निमिषा भारत नहीं आ पा रही थी. इसी वजह से उसने तलाल अब्दो को बेहोशी का इंजेक्शन दिया, ताकि वह अपने कागजात देकर वहां से निकल सके, लेकिन वह दवाई का ओवरडोज हो गया, जिससे तलाल अब्दो की मौत हो गई.

क्या अब भी बच सकती है निमिषा प्रिया की जान

निमिषा प्रिया की जान बच तो सकती है, लेकिन यह काफी मुश्किल है. यमन में इस वक्त कोई स्थिर सरकार नहीं है, वहां हूती शासन है. हूती शासन से सरकार का सीधा संपर्क नहीं है, इस वजह से राजनीतिक प्रयास कितने सफल होंगे कहना मुश्किल है. दूसरा जो आसन उपाय है, वो ये है कि निमिषा के परिजन तलाल के परिजनों को ब्लडमनी देकर समझौता कर लें, तो उसकी जान बच सकती है. इसके प्रयास जारी हैं, लेकिन अबतक तलाल का परिवार इसके लिए राजी नहीं हुआ है. तीसरा एक उपाय यह भी है कि मानवता के नाते निमिषा को बख्श दिया जाए, क्योंकि उसका इरादा हत्या का नहीं बल्कि आत्मरक्षा का था. निमिषा की एक 10 की बच्ची भी है, लेकिन अब इन प्रयासों के लिए समय काफी कम बचा है.

क्या है ब्लड मनी

यमन में शरिया कानून लागू है. इस कानून के हिसाब से अगर किसी व्यक्ति के साथ कोई गंभीर अपराध जैसे हत्या या घायल करने जैसा अपराध हो जाए, तो पीड़ित परिवार को मुआवजे के रूप में मोटी रकम देकर दोषी बच सकता है, बशर्ते की पीड़ित परिवार इसके लिए राजी हो और पैसा देकर दोषी को माफी दे दे. इस पूरी प्रक्रिया को ‘ब्लड मनी’ या शरिया कानून के हिसाब से ‘दिया’ कहा जाता है. इस प्रक्रिया को कोर्ट के संरक्षण में या आपसी सहमति से भी पूरा किया जाता है. निमिषा प्रिया का परिवार तलाल अब्दो के प्रयास से लगातार संपर्क में है, लेकिन अबतक बात नहीं बनी है.

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लेखक के बारे में

Author: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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