India China Relations : ड्रैगन और हाथी अगर साथ आए, तो परेशानी में आ सकता है अमेरिका

India China Relations : विश्व की दो पुरानी सभ्यताएं, जिनका संबंध प्राचीन काल में बेहतर था, अगर वे साथ आ जाएं, तो दुनिया पर क्या असर होगा? क्या अभी जो लोग विश्व के ठेकेदार बनकर बैठे हैं, उनकी सत्ता हिल सकती है? यह सवाल इसलिए कि ट्रंप टैरिफ के दबाव के बीच भारत और चीन ने नए संबंधों की शुरुआत की है. हालांकि भारत और चीन के संबंध इतने उलझे हुए हैं कि अभी इसपर निर्णय की स्थिति में पहुंचना बहुत जल्दबाजी होगी, बावजूद इसके संभावनाओं की तलाश शुरू हो गई है.

India China Relations : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग आज जिस तरह मिले हैं और संबंधों की नई शुरुआत हुई है, अगर यह स्थिति बनी रही तो बेशक विश्व में शक्ति का समीकरण कुछ बदलेगा. भारत और चीन दो ऐसे देश है जो ना सिर्फ मजबूत अर्थव्यवस्था हैं, बल्कि जनसंख्या के लिहाज से भी महाशक्ति हैं. दोनों देशों की कुल आबादी 2.8 अरब से अधिक है. जिनपिंग और मोदी दोनों नेताओं ने संबंध बेहतर बनाने और उसे स्थायी तौर पर बनाए रखने पर जोर दिया है. जिनपिंग ने तो यह भी कहा है कि भारत और चीन को एक बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था बनाने और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को अधिक लोकतांत्रिक बनाने के लिए भी काम करना चाहिए.

बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था बन सकती है

अभी विश्व पर अमेरिका का आधिपत्य है, जबकि शीतयुद्ध के समय विश्व दो ध्रुवीय व्यवस्था में बंटा था. एक गुट अमेरिका की ओर जबकि दूसरा सोवियत रूस की ओर था. भारत और चीन अगर साथ आए तो बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था बन सकती है. भारत और चीन क्योंकि दोनों जनसंख्या और अर्थव्यवस्था में वैश्विक प्रभाव रखते हैं. चीन की औद्योगिक शक्ति और भारत की कृषि क्षमता का संयोजन पश्चिमी प्रभुत्व को चुनौती दे सकता है. ब्रिक्स और एससीओ जैसे मंचों पर सहयोग से विकासशील देशों की आवाज बढ़ेगी, जिससे अमेरिका की शक्ति कम हो सकती है. भारत-चीन अगर आपसी तनाव को कम कर लें तो वैश्विक व्यापार और शांति को बढ़ावा मिलेगा. यह भी संभव है कि रूस-भारत-चीन एक नया वैश्विक समीकरण बना दें.

इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में तनाव घटेगा

भारत और चीन के साथ आने से इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में संबंधों की नई शुरुआत होगी. भारत और चीन के बीच तनाव की वजह से वर्तमान में दक्षिण चीन सागर और हिंद महासागर में क्षेत्रीय असुरक्षा का माहौल दिखता है. अगर दोनों देश के संबंध बेहतर हुए तो समुद्री व्यापार मार्ग सुरक्षित होंगे, जो क्षेत्र के 60% वैश्विक व्यापार को समर्थन देते हैं. क्वाड (भारत, अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया) और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा कम होगी, जिससे सैन्यीकरण का दबाव घटेगा. हालांकि यह काम बहुत चुनौतीपूर्ण है, लेकिन संभावनाएं हैं कि यह संभव है.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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