H1B Visa : भारतीय IT कंपनियों को नुकसान पहुंचाकर, ट्रंप रच रहे हैं भारत के खिलाफ साजिश, 4 प्वाइंट में समझें पूरी बात

H1B Visa Fees : अमेरिकी सरकार हर साल 85,000 लोगों को H1B देकर अमेरिका आने और वहां अस्थायी तौर पर रहने की अनुमति देती है. एच1वीजा लेने वालों में भारतीयों की संख्या बहुत ज्यादा है और इसी बात को ध्यान में रखते हुए ट्रंप प्रशासन ने एच1वीजा के आवेदन की फीस को 100,000 डॉलर प्रति वर्ष कर दिया है. ट्रंप प्रशासन की कोशिश है कि वो भारत पर दबाव बनाए, ताकि भारत उनके आगे झुक जाए और अमेरिका के हित में फैसला करे.

H1B Visa Fees : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को झुकाने के लिए पहले 50% टैरिफ का हथकंडा अपनाया और जब उससे बात नहीं बनी, तो एच1बी(H-1B) वीजा का फीस बढ़ा दिया है. ट्रंप यह चाहते हैं कि भारत अमेरिकी हितों के अनुसार काम करे और विश्व की राजनीति में उनके साथ खड़ा रहे, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे अपने नागरिकों के हितों की अनदेखी करके अमेरिका को फायदा पहुंचाने वाला कोई निर्णय नहीं करने वाले हैं. शनिवार को भी प्रधानमंत्री ने यह कहा है कि भारत आत्मनिर्भर बनेगा और विदेशी शक्तियों के आगे नहीं झुकेगा.

क्या है H1B वीजा?

H1B वीजा अमेरिका द्वारा उन विदेशी कामगारों (non-immigrant) को दिया जाता है, कुछ समय के अमेरिका जाकर अपनी क्षमता और कौशल के अनुसार नौकरी करते हैं. इनमें वैसे लोग होते हैं जिनके पास विशेष कौशल होता है- जैसे आईटी, इंजीनियरिंग, फाइनेंस, मेडिसिन और रिसर्च के क्षेत्र में कार्य करने का विशेष अनुभव. H1B वीजा पर अमेरिका जाने वाले लोग वहां बसने के लिए नहीं जाते हैं, बल्कि वे कुछ समय के लिए वहां अपना योगदान देते हैं. एच1बी वीचा की अवधि 3-6 साल तक की होती है. इस वीजा की मदद से जो विदेशी अमेरिका जाते हैं, उन्हें अमेरिकी कंपनियां अपने यहां नौकरी देती हैं.

सालाना 100,000 डॉलर का अमेरिका ने लगाया शुल्क

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने शुक्रवार को एक घोषणा पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत एच1वी आवेदनों पर सालाना 100,000 डॉलर का शुल्क लगाया जाएगा. पहले यह वीजा लगभग एक लाख रुपए में बन जाता था और अब उसके लिए लगभग 90 लाख रुपए खर्च करने होंगे. The Guardian में छपी खबर के अनुसार यह घोषणा अमेरिकी तकनीकी उद्योग के लिए एक बड़ा झटका है, खासकर उन कंपनियों के लिए जो भारत और चीन के कर्मचारियों पर बहुत अधिक निर्भर है. सालाना 65,000 कर्मचारियों को इस वीजा पर अमेरिका बुलाया जाता है, जबकि विशेष कौशल वाले 20,000 लोगों को यह वीजा दिया जाता है.

भारत को कैसे होगा नुकसान?

अमेरिका द्वारा लगाए गए इस शुल्क का सबसे ज्यादा असर भारत की आईटी कंपनियों को होगा, जो अपने कर्मचारियों को एच1वीजा पर अमेरिका भेजती थीं. 21 सितंबर से नया शुल्क प्रभावी हो जाएगा, कहने का अर्थ यह है कि अब अगर कोई भारतीय कंपनी अपने कर्मचारियों को अमेरिका भेजती है, तो उसे 100,000 अमेरिकी डॉलर खर्च करना होगा. यह आईटी कंपनियों मसलन TCS, Infosys, Wipro और HCL जैसी कंपनियों के लिए बड़ा नुकसान है.

विभिन्न विषयों पर एक्सप्लेनर पढ़ने के क्लिक करें

भारत की ये आईटी कंपनियां अपने अमेरिकी ग्राहकों के लिए सॉफ्टवेयर डेवलमेंट का काम करती हैं, साथ ही उन्हें कंसल्टेंसी भी उपलब्ध कराती है. इन कंपनियों के लगभग सभी साॅफ्टवेयर डेवलपमेंट सेंटर भारत में हैं, लेकिन जब इनके ग्राहक या क्लाइंट उनसे सपोर्ट चाहते हैं जैसे साॅफ्टवेयर की टेस्टिंग और उसे लागू करने में तो ये भारतीय कंपनियां अपने कर्मचारियों को एच1वीजा पर अमेरिका भेजती है. अब जबकि अमेरिका भेजने का खर्च बहुत ज्यादा हो जाएगा तो कंपनियां अपने कर्मचारियों को भेजने में सोचेंगी, जिससे उनकी सर्विस पर असर होगा और इससे उनकी छवि खराब होगी. मजबूरन इन भारतीय कंपनियों को अमेरिका में वहां के लोगों को हायर करना पड़ेगा जब मोटी तनख्वाह मांगेंगे. इससे कंपनी को बड़ा नुकसान है.

अमेरिकी कंपनियां भी भारतीयों को नौकरी देने से बचेंगी

गूगल, अमेजन जैसी कंपनियां भारत से अपनी कंपनियों में कर्मचारी नियुक्त करती हैं और उन्हें एच1वीचा दिलाकर अमेरिका बुला लेती हैं. अब जबकि फीस में बहुत ज्यादा वृद्धि कर दी गई है, तो ये कंपनियां भारतीयों की नियुक्ति से बचेगी, इससे भारतीय प्रतिभाओं को ही नुकसान होगा. The Guardian की रिपोर्ट के अनुसार 2025 की पहली छमाही में, अमेजन के 10,000 से अधिक एच-1बी वीजा स्वीकृत हुए थे, जबकि माइक्रोसॉफ्ट और मेटा के 5,000 से अधिक वीजा स्वीकृत हुए थे. इन आंकड़ों से यह स्पष्ट है कि अमेरिकी कंपनियां कितनी बड़ी संख्या मे एच-1वीजा के तहत अपने यहां नौकरियां देती हैं,लेकिन अब स्थिति बदल सकती है, जिसका असर भारतीय आईटी सेक्टर और इंजीनियर्स पर भी पड़ेगा.

ये भी पढ़ें : क्या है UPS जिसे सरकार बना रही है ओल्ड पेंशन स्कीम का विकल्प, इससे किसको होगा फायदा?

Kudmi movement : कौन हैं कुड़मी या कुरमी? आखिर क्यों करते हैं एसटी कैटेगरी में शामिल करने की मांग

History of Sarnath : अंग्रेज या बनारस के दीवान जगत सिंह, सारनाथ के ऐतिहासिक स्तूपों को उजागर करने का श्रेय किसे? क्या कहते हैं एक्सपर्ट

प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >