कैसे मुमकिन है भारत-पाक दोस्ती

।। प्रभात कुमार रॉय।। (पूर्व सदस्य, एनएसएसी) पा किस्तान के आंतरिक हालात इन दिनों तीव्र गति से निरंतर बिगड़ते चले जा रहे हैं. पाकिस्तान के नार्थ वेस्ट फ्रंटियर में स्थित वजीरिस्तान इलाका उसके लिए एक खतरनाक नासूर बन चुका है. पाकिस्तान की सेना इन दिनों वजीरिस्तान में तहरीक-ए-तालिबान के छापामारों से जबरदस्त तौर पर जंग […]

।। प्रभात कुमार रॉय।।

(पूर्व सदस्य, एनएसएसी)

पा किस्तान के आंतरिक हालात इन दिनों तीव्र गति से निरंतर बिगड़ते चले जा रहे हैं. पाकिस्तान के नार्थ वेस्ट फ्रंटियर में स्थित वजीरिस्तान इलाका उसके लिए एक खतरनाक नासूर बन चुका है. पाकिस्तान की सेना इन दिनों वजीरिस्तान में तहरीक-ए-तालिबान के छापामारों से जबरदस्त तौर पर जंग में जूझ रही है. अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों का विचार है कि पाकिस्तान को नार्थ वेस्ट के इलाके वजीरिस्तान में अपने उन कुकर्मो का परिणाम हासिल हो रहा है, जो पाकिस्तान के हुक्मरानों ने धर्माध दहशतगर्दो की परवरिश देकर अंजाम दिये थे, ताकि वे कश्मीर को पाकिस्तान में विलय कर दें.

पाकिस्तान के हुक्मरानों के साये तले पले तालिबानी आतंकी अब पाकिस्तान को ही ध्वस्त करने में जुटे हैं. तालिबान की मदद अलकायदा द्वारा अमेरिका के न्यूयार्क में वल्र्ड ट्रेड सेंटर पर 2001 में अंजाम दिये गये 9/11 आक्रमण के बाद नाटो फौजों ने तालिबान हुक्मरानों को अफगान राजसत्ता से बेदखल किया. तब से अफगानिस्तान में तालिबान के विरुद्ध पाकिस्तान और अमेरिकी सहयोग के कारण तालिबान तत्व अपने पुराने परिपोषक आका पाकिस्तान के प्रबल दुश्मन बन बैठे हैं. तालिबानी आधिपत्य से अपने इलाके को मुक्त कराने के लिए पाक वायुसेना के एफ-16 लड़ाकू विमान तालिबान गुरिल्लों पर प्राय: बम वर्षा करते रहते हैं. पाकिस्तान हुकूमत ने कहा कि इसमें मारे गये लोग तालीबान आतंकवादी थे, जबकि तहरीक-ए-तालिबान ने दावा किया कि पाक वायुसेना के हवाई हमलों में निदरेष नागरिक हलाक हुए.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने सत्तानशीन होने के बाद अपना वादा पूरा करते हुए तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के साथ शांतिवार्ता का बाकायदा आगाज किया. इसके लिए तहरीक-ए-तालीबान के समक्ष युद्ध विराम की कोई शर्त भी पाकिस्तान द्वारा आयद नहीं की गयी. तालीबान गुरिल्लों और पाक फौज के मध्य जंग भी जारी रही है और आपस में शांतिवार्ता भी चल रही है. तरीकबन एक महीने से अधिक हो गया है, इस शांतिवार्ता को चलते हुए. पाकिस्तान की ओर से चार और तहरीक-ए-तालिबान की तरफ से तीन वातार्कार शांतिवार्ता में शिरकत कर रहे हैं. तहरीक-ए-तालिबान ने पेशकश की थी कि शांतिवार्ता से पहले युद्धविराम किया जाये, किंतु अमेरिका के गहन कूटनीतिक दबाव के कारण पाक हुकूमत इस शर्त को स्वीकार नहीं कर सकी. अमेरिका के कूटनीतिज्ञों को खतरा रहा कि शांतिवार्ता की आड़ में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान, जो अफगानी तालिबान के सहयोगी रहे हैं, अपनी सैन्य ताकत को नार्थ वेस्ट फ्रंटियर के इलाकों में और अधिक मजबूत कर सकते हैं. पाकिस्तान का दावा रहा है कि तहरीक-ए-तालिबान के साथ बातचीत पाक संविधान के दायरे में हो रही है.

तहरीक-ए-तालीबान और पाकिस्तान हुकूमत के मध्य परस्पर बातचीत का अभी तो आगाज ही हुआ था कि पाकिस्तान के सबसे बेहतरीन कमांडो ब्रिगेड के सैन्य ट्रक में बारूद से भरी एक कार से तालिबान ने विस्फोट अंजाम दिया गया. उसने और भी कई हमले किये. तहरीक-ए-तालिबान के एक प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तान की सेना द्वारा मारे गये तालिबान लड़ाकों का प्रतिशोध लिया गया. पाक हुकूमत द्वारा तहरीक-ए-तालिबान गुरिल्लों का जवाब एफ-16 लड़ाकू विमानों द्वार अंजाम दिये गये आक्रमणों से दिया गया. आधी रात के वक्त से प्रारम्भ हुई बमबारी तीन दिनों तक निरंतर चलती रही. बहुत से लोग मारे गये. सरकार ने दावा किया कि इन हमलों में मारे गये तालिबान दहशतगर्दो में कुख्यात तालिबान लीडर अस्मातुल्लाह शाहीन भी था.

दहशतगर्दो के संबंध में पाकिस्तान दोहरी रणनीति पर बदस्तूर कायम रहा है. एक तरफ तालिबान की ताकत को तहत-नहस करने के लिए पाकिस्तान फौज नार्थ वेस्ट फ्रंटियर में कई वर्षो से युद्धरत रही है और दूसरी ओर पाकिस्तान ने कश्मीर को हड़पने की गरज से जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मौलाना मसूद अजहर और उसके जेहादी साथियों को पनाह दी हुई है. पाकिस्तान को अपनी दोहरी नीति का परित्याग करना होगा और तमाम तरह के जेहादी दहशतगर्दो को समाप्त करना होगा. भारत के साथ पाकिस्तान की मित्रता और सहयोग तभी मुमकिन हो सकेगा, जब वह कश्मीर घाटी में सक्रिय दहशतगर्दो को उसी तरह अपना शत्रु घोषित कर देगा, जैसे तहरीक-ए-तालीबान को दुश्मन करार दिया हुआ है. पाकिस्तान का एक आधुनिक राष्ट्र बनना जरूरी है. भारत के साथ सच्ची दोस्ती करके ही यह मुमकिन होगा कि पाकिस्तान और भारत दोनों मुल्क एक साथ एकजुट होकर धर्माध जेहादियों से संघर्ष करके उनको समाप्त कर सकेगें. पाकिस्तान यदि कश्मीर को हथियाने की गिरह अपने दिलो-दिमाग से निकाल फेंके, तो दोनो देशों की दोस्ती मुमकिन हो सकती है.

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