इस चुनावी वर्ष में कांग्रेस को चुनाव खर्च के लिए लगता है कि अत्यधिक धन की आवश्यकता आ पड़ी है. शायद इसीलिए जनता को ठगने का प्रयास किया जा रहा है. घरेलू रसोई गैस की सब्सिडी वाले सिलिंडर की कीमत 450 रुपये से बढ़कर अप्रैल 2014 में 900 रुपये हो सकता है. यह बढ़ोतरी आम करदाताओं पर भारी पड़नेवाली है.
आम जनता इसके पीछे की कहानी समझ नहीं पा रही है. समझने वाली बात है कि देश में उत्पादित गैस की कीमत डॉलर में आंकना कहां की बुद्धिमानी है. देश के लिए यह सही नहीं है कि सरकारें जनता को नजरअंदाज करते हुए किसी कंपनी को अनुचित लाभ दिलाये. ऐसा लगता है कि सरकार आम जनता की भलाई से ज्यादा ध्यान औद्योगिक घरानों की भलाई पर दे रही है. सरकारों को ‘क्रोनी कैपिटलिज्म’ से बचना चाहिए, क्योंकि यह विकास का टिकाऊ फॉर्मूला नहीं हो सकता.
संजय चंद, हजारीबाग
