जावेद इस्लाम
प्रभात खबर, रांची
‘नरेंद्र मोदी मिशन 272 प्लस और मुसलमानों की भूमिका’ विषय पर भाजपा द्वारा आयोजित सेमिनार में जाने तथा पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष माननीय राजनाथ सिंह के बहुमूल्य विचार सुनने के सुअवसर से मैं अभागा वंचित रह गया. पर मीडिया से जाना-समझा कि सेमिनार हॉल में मुसलमानी टोपी पहने लोगों को देख कर राजनाथ जी भावविह्वल हो गये. मन में द्वंद्व उठने लगा और वे पूर्व में हुई भाजपाई गलती के लिए उनसे माफी मांगने को तत्पर हो उठे.
बोले-‘‘हम लोगों की तरफ से पूर्व में कोई गलती या चूक हुई होगी, तो मैं आपको यकीन दिलाता हूं, शीश झुका कर क्षमा मांग लेंगे.’’ मुङो यकीन है कि उनके ये उद्गार सुन कर हॉल में बैठे लोगों की आंखें भर आयी होंगी. मगर मुझ नासमझ को यह समझ में नहीं आ रहा था कि भला मानुस माफी किस गलती के लिए मांगने को उद्दत था, जब उन्हें खुद नहीं पता कि पार्टी की ओर से क्या गलती हुई है? शायद इसीलिए उन्होंने अपना यह ऐतिहासिक वक्तव्य ‘अगर’ लगा कर दिया. मुङो भी याद नहीं कि उनकी पार्टी भाजपा, भूतपूर्व पार्टी जनसंघ, पितृ संगठन आरएसएस या इसके जटा-जूट संगठनों ने कभी कोई गलती की हो. इनके आला नेताओं या अदना कार्यकर्ताओं ने मुसलमानों के विरुद्ध कभी गलती से भी कोई गलती की हो. गुजरात दंगा सहित देश में अब तक हुए हजारों दंगों में संघ परिवार के लोगों की संलिप्तता के जो आरोप लगते रहे हैं, वह सब तो साजिश है.
बाबरी मसजिद ध्वंस की घटना महज एक चूक थी, आडवाणी जी की ऐसी कोई पूर्व-नियोजित मंशा नहीं थी. भाजपा-संघ परिवार के लोग तो मुसलमानों के साथ हमेशा प्रेम व पुचकार का आचरण करते रहे हैं. इन सबके बावजूद वे क्यों माफी मांगने के लिए तैयार हुए? असल में यह राजनाथ जी के हृदय की उदारता और विशालता है. उस गलती के लिए जो हुई है या नहीं, यह निश्चित नहीं है, माफी मांगना या मांगने की बात कहना हृदय की विशालता का ही तो परिचायक है! मगर पार्टी के एक आला नेता ने अगले दिन ही यह बयान कि ‘भाजपा मुसलमानों से माफी नहीं मांगेगी’ देकर हृदय के विशाल गुब्बारे में पिन चुभो दी. माफी और उनसे कभी नहीं! सही है, ‘एक नंबर का नागरिक’ ‘दोयम दरजे के नागरिक’ से माफी मांगे, यह वकार के मुताबिक नहीं है.
यह तो हेडगेवार और गुरु गोलवलकर को शीर्षासन कराना होता. बेचारे राजनाथ जी भी क्या करें, मिशन 2014 कोई सीधी खीर तो है नहीं. कांग्रेस विरोधी हवा और चुनावी सर्वेक्षण एजेंसियों की पूरी दुआ के बावजूद 272 के जादुई आंकड़े को लेकर दिल में धुकधुकी जो लगी हुई है. वो तो सेमिनार में थोड़ा सच, थोड़ा झूठ बोल कर, स्वांग रच कर मुसलमानों को भरमा रहे थे. 272 प्लस का लक्ष्य पाने के लिए मुसलिम वोट को पोट रहे थे. क्या बुरा है अगर सांप भी मर जाये और लाठी भी न टूटे तो? कौन नहीं छल रहा मुसलिमों को?
