‘हो गयी है पीर पर्वत सी पिघलनी चाहिए, इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए’- दुष्यंत कुमार की ये पंक्तियां आज भी सार्थक हैं. आज अगर देश की स्थिति देखें, तो लोग कांग्रेस की सरकार से अब तंग आ गये हैं. 2जी, कोलगेट जैसे बड़े घोटाले भी इसी के राज में जनता ने देख लिये हैं. जहां कांग्रेस का नारा ‘गरीबी हटाओ’ था, वहीं जनता को महंगाई का सामना करना पड़ रहा है.
देश की बिगड़ती स्थिति पर अपने प्रधानमंत्री को चुप रहते हुए भी जनता ने देखा है. तो अब साफ-सुथरी गंगा की दरकार क्यों न हो? नयी गंगा बहाने में भी कई लोग लगे हुए हैं. इस बार कांग्रेस की कमान राहुल गांधी संभाले हुए हैं युवा जोश के साथ और अपनी सरकार की आलोचना खुद कर रहे हैं. वहीं, दूसरी ओर नरेंद्र मोदी अपने विकास के मॉडल के साथ डटे हैं. जनता किसे चुनेगी, यह समय बतायेगा.
रविकांत गुप्ता, रांची
