मेरा राजनैतिक और संवैधानिक ज्ञान थोड़ा कम है, लेकिन इतना तो जानता हूं कि आचार संहिता लागू होने के बाद सरकार कोई अहम फैसला नहीं लेती और ना ही कोई घोषणा कर सकती है. लेकिन पिछले दिनों दो राज्यों के नेताओं ने अपने-अपने राज्य में हड़ताल की. बिहार में सुशासन बाबू ने बंद का आह्वान किया था, तो झारखंड में आजसू पार्टी ने.
पता नहीं, इस बंद का आधार क्या था. आचार संहिता लागू होने से एक-दो दिन पहले ऐसे बंद का आह्वान कर क्या साबित करना चाहते हैं ये लोग? ये जानते हुए कि इस बंद का कोई परिणाम नहीं निकलेगा, क्योंकि इसके लिए अब समय पर्याप्त नहीं है. सवाल है कि ये दल इतने दिनों से सोये थे क्या? अचानक से चुनाव के समय नींद टूटी और चल दिये झंडा-डंडा लेकर जनता को परेशान करने और अपनी शक्ति दिखाने!
सौरभ मिश्र, बोकारो स्टील सिटी
