आज झारखंड के राष्ट्रीय राजमार्ग का नक्शा बदल रहा है. पर, क्या यह बदलाव राज्य के विकास का द्योतक है या विकास को दिखा कर किये जा रहे नुकसान पर झारखंड और केंद्र की सरकारें आम जनता को बेवकूफ बना रही हैं. आज एनएच 33 का कायाकल्प आनन-फानन में हो रहा है, लेकिन उसके विकास के साथ-साथ हो रही छायादार व फलदार पेड़ों की कटाई तथा पर्यावरण के नुकसान को राज्य सरकार नकार रही है.
आज झारखंड के पर्यावरण की सुंदरता एवं उसके मोहक दृश्य की चर्चा-परिचर्चा भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी होती है. जितने पेड़ों को विकास की परिभाषा देते हुए नष्ट कर दिया गया है, उनकी भरपाई के लिए सरकार क्या कर रही है? आज हाइवे कि किनारे लगे पौधे पर्यावरण को बचाने की नीति कम और खाओ-पकाओ की साजिश की ओर इशारा ज्यादा करते हैं.
विक्रम परमार, हजारीबाग
