बढ़ती संवेदनहीनता, उत्तरदायी कौन?

मीडिया में पिछले कुछ दिनों से लगातार मृतकों के शव के अपमान की खबरें पढ़ने और देखने को मिल रही हैं. आखिर देश का शासन-प्रशासन इतना संवेदनशून्य कैसे हो गया कि उसके कान पर जूं तक नहीं रेंगती? कोई एंबुलेंस के अभाव में शव को कंधे पर लाद कर कई किलोमीटर की दूरी पैदल तय […]

मीडिया में पिछले कुछ दिनों से लगातार मृतकों के शव के अपमान की खबरें पढ़ने और देखने को मिल रही हैं. आखिर देश का शासन-प्रशासन इतना संवेदनशून्य कैसे हो गया कि उसके कान पर जूं तक नहीं रेंगती?
कोई एंबुलेंस के अभाव में शव को कंधे पर लाद कर कई किलोमीटर की दूरी पैदल तय कर रहा है तो कोई कूड़ा-कचरा एकत्रित करके शव का अंतिम संस्कार कर रहा है़ कहीं शव की हड्डियां तोड़ी जा रही हैं, ताकि वह गठरी में समा सके़ क्या यह दुर्भाग्यपूर्ण नहीं है कि इनसान इतना संवेदनहीन होता जा रहा है? क्या हमारा समाज इसके लिए उत्तरदायी नहीं है? भारत में मृतकों का अपमान कब तक होता रहेगा? क्या हमारा समाज इसके लिए उत्तरदायी नहीं है?
प्रशांत कु सिन्हा, हजारीबाग

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