हो-हंगामा करनेवालों से बचना जरूरी

स्थानीय नीति पर इन दिनों नेताओं ने हाय-तौबा मचा रखी है, जबकि यही नेता जब सत्ता में थे तो स्थानीय नीति की दिशा में कोई काम नहीं किया़ आज इन नेताओं के पास राज्य के विकास को लेकर कोई चिंता नहीं है, केवल अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने के सिवा इनका और कोई उद्देश्य नहीं है़ […]

स्थानीय नीति पर इन दिनों नेताओं ने हाय-तौबा मचा रखी है, जबकि यही नेता जब सत्ता में थे तो स्थानीय नीति की दिशा में कोई काम नहीं किया़ आज इन नेताओं के पास राज्य के विकास को लेकर कोई चिंता नहीं है, केवल अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने के सिवा इनका और कोई उद्देश्य नहीं है़ इन लोगों का उद्देश्य केवल राजनीति में हो-हंगामा करना है़
जब सत्ता में रहते हैं तो न खुद कुछ करते हैं, न किसी को कुछ करने देते हैं. यहां के कुछ नेताओं ने तो हर बात पर विरोध-प्रदर्शन करने की अपनी आदत बना ली है़ कुछ लोग ऐसे ही करके मीडिया में बने रहना चाहते हैं. ऐसे ही इन दिनों दखल दिहानी को लेकर बहुत ज्यादा हंगामा मचा हुआ है़
कुछ लोग तो जैसे देखते रहते हैं कि कब मौका मिल जाये और वे अपना दल-बल सजाकर हंगामा करने निकल पड़ें. वह भी बिना सोचे-समझे कि क्या ठीक है और क्या गलत़ मीडिया में चेहरा चमकाने की जुगत में रहनेवाले ऐसे लोगों से सावधान रहने की आवश्यकता है़
सुजीत कुमार, ई-मेल से

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >