पिछले दिनों केंद्रीय कैबिनेट ने सरोगेसी विधेयक (2016) को मंजूरी दे दी़ जनहित के लिए बनाये गये इस कानून का स्वागत किया जाना चाहिए़ पिछले एक दशक से किराये की कोख का दुरुपयोग बड़े पैमाने पर हो रहा था़ मीडिया में भी समय-समय पर इस मुद्दे को उठाया.
सरकार ने कानून बनाकर सही कदम उठाया है़ अब इस तकनीक को व्यवसाय बनने से रोका जा सकता है़ नियमों के अंतर्गत अपनायी गयी सरोगेसी और आइवीएफ तकनीक एक वरदान है़ इससे नि:संतान लोगों के जीवन का अंधेरा दूर होता है़ अब जरूरी है कि अस्पताल और प्राइवेट क्लिनिक इस बात को समझें और बनाये गये नये नियमों का ईमानदारी से पालन करें.
खुशबू सिंह, जमशेदपुर
