आजकल हर जगह ओलिंपिक पदक विजेता पीवी सिंधु और साक्षी मलिक की चर्चा हो रही है़ हो भी क्यों न? उन्होंने उस देश को गौरवान्वित होने का मौका दिया है़ जहां आज भी महिलाओं को बस चूल्हा-चौका के लायक समझा जाता है़ चौक-चौराहों पर महिला सशक्तीकरण की बात करने वाले तो हजारों मिल जायेंगे लेकिन इनमें अधिकांश बस बातें ही करते हैं.
बहुत कम होंगे जो इस पर अमल करने का साहस दिखा पाते हैं. लेकिन लोगों को यह जरूर याद रखना चाहिए कि पीवी सिंधु और साक्षी मलिक भी किसी की बेटी ही हैं. अगर उनके माता-पिता की मानसिकता भी अन्य की भांति होती, तो आज शायद भारत ओलिंपिक में पदकविहीन देशों की कतार में शामिल रहता. हमें जरूरत है बेटियों के प्रति अपनी मानसिकता बदलने की़
मनोज कु पांडेय, ई-मेल से
