हमारे देश में भ्रष्टाचार एक बड़ी समस्या है. यह एक ऐसे जहर के समान है, जो जनता के विश्वास को तोड़ कर रख देता है. आर्थिक विकास में यह बाधक साबित होता है. भ्रष्टाचार एक ऐसे घुन के समान है, जो देश को अंदर ही अंदर खोखला करता चला जाता है.
वर्तमान में सरकार भ्रष्टाचार को खत्म करने में जुटी हुई है, लेकिन अभी पूरी तरह से सफलता नहीं मिली है. इस मुद्दे से आंखें फेर लेना सरकार के लिए मुश्किल होगा. देश का कोई भी कोना हो, जनता भी इससे त्रस्त हो चुकी है. प्रधानमंत्री कहते हैं कि न खाऊंगा और न खाने दूंगा. अब समय आ गया है कि इस विषय पर गंभीरता से कार्रवाई की जाये.
प्रणय सौरभ, रांची
