इनोवेशन और विकास

वैश्वीकरण और सूचना-तकनीक के आधुनिक दौर में इनोवेशन यानी नवोन्मेष को विकास का प्रेरक तत्व माना जाता है. लेकिन, भारतीय अर्थव्यवस्था के बारे में यह बहुप्रचारित तथ्य है कि इसने उच्च विकास दर तो हासिल कर ली है, इनोवेशन आधारित उच्च तकनीक के मामले में अभी ज्यादातर क्षेत्रों में पीछे है. ऐसे समय में ‘ग्लोबल […]

वैश्वीकरण और सूचना-तकनीक के आधुनिक दौर में इनोवेशन यानी नवोन्मेष को विकास का प्रेरक तत्व माना जाता है. लेकिन, भारतीय अर्थव्यवस्था के बारे में यह बहुप्रचारित तथ्य है कि इसने उच्च विकास दर तो हासिल कर ली है, इनोवेशन आधारित उच्च तकनीक के मामले में अभी ज्यादातर क्षेत्रों में पीछे है. ऐसे समय में ‘ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स 2016’ में भारत की 15 अंकों की छलांग एक उम्मीद जगाती है.
हालांकि, इस इंडेक्स में पिछले साल के 81वें स्थान से इस साल हम 66वें स्थान पर जरूर पहुंच गये हैं, लेकिन नहीं भूलना चाहिए कि 2013 में भी हम इसी स्थान पर थे. रिपोर्ट में भारत की इस बात के लिए सराहना की गयी है कि इसने पिछले एक साल में अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) के क्षेत्र को मजबूती प्रदान की है, विश्वविद्यालयों और वैज्ञानिक प्रकाशनों का स्तर सुधारा है, सूचना एवं संचार तकनीक आधारित सेवाओं के निर्यात में शीर्ष पर पहुंचा है.
और इस आधार पर ब्रिक्स देशों में भारत को ब्राजील से ऊपर स्थान दिया गया है, लेकिन चीन, रूस, दक्षिण अफ्रीका अब भी हमसे ऊपर हैं. खासकर चीन आरएंडडी पर खर्च लगातार बढ़ा रहा है, जिसकी बदौलत इस इंडेक्स में वह 25वें स्थान पर और ब्रिक्स देशों में पहले स्थान पर पहुंच गया है. इंडेक्स में स्विट्जरलैंड को पहले, स्वीडन को दूसरे, यूके को तीसरे और अमेरिका को चौथे स्थान पर रखा गया है. उल्लेखनीय है कि भारत में इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए अगस्त 2010 में तत्कालीन केंद्र सरकार ने नेशनल इनोवेशन काउंसिल के गठन को मंजूरी दी थी. साथ ही 2010 से 2020 को ‘इनोवेशन दशक’ घोषित किया था. 2014 में नयी सरकार बनने पर यह काउंसिल निष्क्रिय हो गयी. फिर, 2015 में प्रधानमंत्री मोदी ने इनोवेशन को देश के विकास के केंद्र में लाने की पहल की और उनके निर्देश पर नीति आयोग ने इनोवेशन का रोडमैप तैयार करने के लिए एक नयी कमेटी बनायी. इस कमेटी के सुझाव पर स्टार्टअप को वित्तीय सहायता देने के लिए फंड बनाया गया.
कमेटी ने इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए देश की यूनिवर्सिटी व्यवस्था में व्यापक सुधार की जरूरत पर भी बल दिया है. कहने की जरूरत नहीं कि हमारे देश में इनोवेटिव माइंड्स की कमी नहीं है, लेकिन विकास की प्रक्रिया में उनका उपयोग करने के लिए आइआइटी और आइआइएम जैसे प्रमुख शिक्षण संस्थानों को समयबद्ध तरीके से इनोवेशन सेंटर में तब्दील करना जरूरी है.
इसी कड़ी में ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में यह सलाह भी दी गयी है कि बिजनेस इन्वायर्नमेंट (117वां स्थान), शिक्षा (118वां), नया बिजनेस शुरू करने में सुविधा (114वां) और छात्र-शिक्षक अनुपात (103वां) जैसे कई अहम क्षेत्रों भारत को अभी काफी काम करने की जरूरत है.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >