खुली फरियाद

नौकरी से रिटायर हुए ज्यादातर लोग अमूमन किसी बड़ी बीमारी का शिकार बन जाते हैं. सरकार द्वारा बुजुर्गों के संरक्षण एवं सुविधा देने की कोशिशों पर कुछ विभागों ने पानी फेरने का हरसंभव प्रयास किया है़ आयकर विभाग, जिसे लोगों को ‘चोर’ न समझने की नसीहत दी गयी है, गड़े मुर्दे उखाड़ने में लगा है. […]

नौकरी से रिटायर हुए ज्यादातर लोग अमूमन किसी बड़ी बीमारी का शिकार बन जाते हैं. सरकार द्वारा बुजुर्गों के संरक्षण एवं सुविधा देने की कोशिशों पर कुछ विभागों ने पानी फेरने का हरसंभव प्रयास किया है़ आयकर विभाग, जिसे लोगों को ‘चोर’ न समझने की नसीहत दी गयी है, गड़े मुर्दे उखाड़ने में लगा है. हाल ही में इस विभाग ने 10 वर्षों के पुराने रिटर्न खंगालते हुए ब्याज सहित लगभग लाख रुपये का ‘डिमांड’ भेजा, वह भी पुराने अभिलेखों की जांच के बगैर.
जिंदगी भर की जमा पूंजी पर जीने वाले कमजोर दिल इनसान के लिए अचानक आया ‘डिमांड’ मौत के पैगाम से कम नहीं. दलीलें कुछ भी हों, सवाल यह उठता है कि आम आदमी 10 वर्षों के दस्तावेज क्यों और कब तक रखे? 10 वर्षों का ‘सूद’ करदाता क्यों दे, जबकि कर निर्धारण प्रति वर्ष होता हो? रिटर्न जमा करने की तारीख तय है तो स्क्रूटिनी की क्यों नहीं? ‘टैक्स आतंकवाद’ तो खत्म हुआ, अब खुली फरियाद है कि टैक्स ‘आतंकी’ भी खत्म हों.
एमके मिश्रा, रातू, रांची

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