दाल या ड्रायफ्रूट?

पहले चीनी ने हिलाया फिर प्याज ने रुलाया और अब दाल ने गरीबों की सारी आमदनी को खाया़ आम आदमी को समझ नहीं आ रहा है कि दाल खायें या ड्रायफ्रूट! वैसे अब कुछ भी खायें, ज्यादा का अंतर नजर नहीं आ रहा है़ सरकार बनने से पहले लोगों को जादू की छड़ी दिखायी गयी […]

पहले चीनी ने हिलाया फिर प्याज ने रुलाया और अब दाल ने गरीबों की सारी आमदनी को खाया़ आम आदमी को समझ नहीं आ रहा है कि दाल खायें या ड्रायफ्रूट! वैसे अब कुछ भी खायें, ज्यादा का अंतर नजर नहीं आ रहा है़

सरकार बनने से पहले लोगों को जादू की छड़ी दिखायी गयी कि महंगाई, भ्रष्टाचार ऐसे गायब हो जायेगा जैसे जादूगर कपड़े के नीचे से टोपी को गायब कर देता है़ मगर जब सरकार बन गयी तो हमारे नेता ऐसे बयान देते हैं, मानो कह रहे हों कि भैया हम तो खुद ही इसके मारे हैं. शायद ये समझ गये हैं कि जुमले सुनाने और उन पर काम करने में अंतर होता है.

महमूद फारूकी, गोड्डा

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