पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने क्रिकेट सच में ‘जेंटलमेन गेम’ बनाने की लोढा समिति की अधिकांश सिफारिशों को मानते हुए दुनिया की सबसे धनवान क्रिकेट संस्था बीसीसीआइ को साफ-सुथरी बनाने के लिए कई बातें साफ कर दी हैं.
मंत्रियों, प्रशासनिक अधिकारियों व सत्तर साल से अधिक उम्र के लोगों के बोर्ड का पदाधिकारी बनाने पर रोक, वन पर्सन-वन वोट और वन स्टेट-वन वोट के फार्मूले की सिफारिश मान ली गयी़ समिति की रिपोर्ट का क्रियान्वयन छह माह में होना है़ ऐसे में यह साफ हो चुका है कि दशकों से कुंडली मारे बैठे दिग्गजों की विदाई का वक्त आ गया है़ सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का असर छह माह बाद ही पता चलेगा, लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं है कि साफ-सुथरे क्रिकेट के लिए यह कदम ऐतिहासिक है.
पायल बजाज, बोकारो
