दोषी आखिर कौन?

सरकारी स्कूलों में पढ़ाई नहीं होती? शिक्षक पढ़ाते क्यों नहीं? किसी सरकारी शिक्षक से पूछें तो पता चलता है कि दिन, महीने, साल तो दाल और चावल के हिसाब में ही निकल जाते हैं. सरकार ने जनगणना का काम भी शिक्षक के जिम्मा रखा है. जांच कमेटी भी गठित इसलिए नहीं की जाती कि पढ़ाई […]

सरकारी स्कूलों में पढ़ाई नहीं होती? शिक्षक पढ़ाते क्यों नहीं? किसी सरकारी शिक्षक से पूछें तो पता चलता है कि दिन, महीने, साल तो दाल और चावल के हिसाब में ही निकल जाते हैं. सरकार ने जनगणना का काम भी शिक्षक के जिम्मा रखा है.
जांच कमेटी भी गठित इसलिए नहीं की जाती कि पढ़ाई का स्तर क्या है या शिक्षक पढ़ाते हैं भी कि नहीं, बल्कि इसलिए की जाती है कि दाल में पानी का स्तर क्या है, शिक्षक भोजन बनवा भी रहे हैं या नहीं! मध्याह्न भोजन बच्चों को स्कूल लाने के लिए जरूरी है, लेकिन शिक्षकों को पढ़ाने के बजाय इसमें क्यों लगा दिया गया है. मंत्री जी कहते हैं दोषियों को बख्शा नहीं जायेगा, पर सवाल है कि दोषी आखिर कौन है?
महमूद फारूकी, गोड्डा

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