देर आये दुरुस्त आये

बच्चे किसी भी समाज का भविष्य होते हैं. भविष्य की जिम्मेवारी उन्हीं के कंधों पर होती है. आजकल स्कूलों मे पौधरोपण की खबरें बहुत आ रही हैं. यह अच्छी बात है. साथ ही बारिश का मौसम होने से इसमें सहायता भी मिलेगी. प्रकृति से छेड़छाड़ का नतीजा बच्चे देख चुके हैं. वे अच्छी तरह समझ […]

बच्चे किसी भी समाज का भविष्य होते हैं. भविष्य की जिम्मेवारी उन्हीं के कंधों पर होती है. आजकल स्कूलों मे पौधरोपण की खबरें बहुत आ रही हैं. यह अच्छी बात है. साथ ही बारिश का मौसम होने से इसमें सहायता भी मिलेगी. प्रकृति से छेड़छाड़ का नतीजा बच्चे देख चुके हैं.
वे अच्छी तरह समझ चुके हैं कि वृक्षों का महत्व क्या है. प्रकृति के साथ सहजीवन का महत्व भी उन्हें समझ मूें आ चुका है. लेकिन, बच्चों को सिर्फ पौधा लगाने के लिए बताना काफी नहीं होगा. हमारी जिम्मेवारी है कि हम उन्हें बतायें कि पौधों की देखभाल भी जरूरी है.
उन्हें यह बताना होगा कि जिस तरह छोटे बच्चे अपने अभिभावक पर आश्रित होते हैं, बिना उनकी देखभाल के उनका जीवित रहना लगभग असंभव हैं, उसी तरह पौधों के बड़े होने के लिए शुरुआत में देखभाल की जरूरत होती है. खैर, बिल्कुल ना से कुछ तो अच्छा हो रहा है.
सीमा साही, बोकारो

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