भ्रष्टाचार के कंकड़

देशभर में आये दिन अनेक सरकारी निर्माण कार्य होते रहते हैं. इनमें सड़क, पुल, भवन आदि का निर्माण शामिल है. इन कार्यों के लिए पर्याप्त राशि तो प्राक्कलित हो जाती है, परंतु इन निर्माण कार्यों में गुणवत्ता दूर-दूर तक नजर नहीं आती. क्या इसके कारणों से सरकार अनभिज्ञ है? यदि नहीं तो फिर सरकारी निर्माण […]

देशभर में आये दिन अनेक सरकारी निर्माण कार्य होते रहते हैं. इनमें सड़क, पुल, भवन आदि का निर्माण शामिल है. इन कार्यों के लिए पर्याप्त राशि तो प्राक्कलित हो जाती है, परंतु इन निर्माण कार्यों में गुणवत्ता दूर-दूर तक नजर नहीं आती. क्या इसके कारणों से सरकार अनभिज्ञ है?

यदि नहीं तो फिर सरकारी निर्माण कार्यों पर से भ्रष्टाचार का काला साया कब हटेगा? कब तक ये टूटी-फूटी सड़कें दुर्घटनाओं में आम जनता की जानें लेती रहेंगी? कब तक लोग टूटे भवनों के मलबे के नीचे दबते रहेंगे? कुछ लोगों के बुरे कामों का फल हजारों-लाखों लोगों को भुगतना पड़ता है. मेरे विचार से जिस राह पर भ्रष्टाचार के कंकड़ भरे पड़े हों, उस पर विकास की गाड़ी आगे कैसे बढ़ सकती है?

गिरिधारी कुंडू, ई-मेल से

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