महंगाई हुई इधर से उधर

आज वर्तमान समय में सबसे बड़ा मसला महंगाई को लेकर चल रहा है. राजनीतिक पार्टियों के सामने भी आज यह मुद्दा गंभीर है. संसद में कई बार यह सवाल सामने आया है. विपक्षी दल का आरोप है कि भाजपा सरकार के आने से महंगाई के काफी बढ़ोतरी हुई है. वहीं भाजपाई इस बात से असहमत […]

आज वर्तमान समय में सबसे बड़ा मसला महंगाई को लेकर चल रहा है. राजनीतिक पार्टियों के सामने भी आज यह मुद्दा गंभीर है. संसद में कई बार यह सवाल सामने आया है. विपक्षी दल का आरोप है कि भाजपा सरकार के आने से महंगाई के काफी बढ़ोतरी हुई है.
वहीं भाजपाई इस बात से असहमत हैं. मोदी सरकार का कहना है कि पिछले सरकार की मुद्रास्फीति को संतुलित बनाने के लिए महंगाई आयी है. इस प्रकार की बहस तो राजनीति में चलना स्वाभाविक है.
यदि सही मायने में महंगाई को लेकर विचार करते हैं, तो हम निष्कर्ष स्वरूप यह पाते हैं कि महंगाई में न तो वृद्धि हुई और न ही कमी आयी. चूंकि जहां एक ओर आज दाल-सब्जी की कीमत में वृद्धि हुई, वहीं दूसरी ओर इलोक्ट्रॉनिक वस्तुएं जैसे स्मार्टफोन आदि की कीमतों में कमी आयी है.
इन सबको देखने से यह कहना गलत नहीं होगा कि महंगाई बढ़ी नहीं बल्कि इधर से उधर हो गयी. फिर भी आज आम जनता के संतोष के लिए सरकार को खाने की सामग्री पर ध्यान देने की जरूरत है़
मिथिलेश शर्मा, साबड़ा, बोकारो

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