हम आये दिन सुनते हैं कि फलाने जगह हाथियों ने फसल तबाह कर दी या घरों को तोड़ दिया या किसी को कुचल कर मार डाला. हमें यह समझना होगा कि हाथी हमारे घर में घुस रहे हैं या हम उनके घरों मे घुस गये हैं?
आज जिस तरह से वनों की कटाई हो रही है उससे वन्य जीव-जंतुओं का घर तबाह हो कर काफी सीमित हो गया है. क्या इसी को हम विकास कहते हैं? मनुष्य को यह समझना ही नहीं वरन विश्वास भी करना होगा कि बिना पेड़-पौधों के धरती पर जीवन मुमकिन नहीं है और बिना जीवन के किसका और कैसा विकास?
अब समय आ गया हैं कि मनुष्य चेते और विकास के नाम पर वनों की अंधाधुंध कटाई बंद करे, वरना पूरी मनुष्यता खतरे में पड़ जायेगी. हमने पहले ही धरती को बहुत नुकसान पहुंचा दिया है. अगर कोई पेड़ काटना जरूरी हो, तो नये पौधे भी लगाना लाजिमी है और सिर्फ पेड़ लगाने से ही हमारी जिम्मेवारी पूरी नहीं हो जाती, वरन उसकी देखभाल सुनिश्चित करना हमारी ही जिम्मेदारी है.
सीमा साही, बोकारो
