अभी हाल में ही बड़े -बुजुर्ग सेक्शन में एक लघु कथा पढ़ी जिसमें एक बुजुर्ग आदमी अपने आपको एक रद्दीवाले से खरीदने के लिए कहता है. ऐसा उसने इसलिए कहा क्योंकि अपनी नौकरी से सेवानिवृत्त होने के पश्चात उसने सोचा था कि वह अपना वक्त परिवार के बीच गुजारेगा. पर, ऐसा हो नहीं हो पाया, क्योंकि परिवार के लोगों के पास उस व्यक्ति के लिए वक्त ही नहीं है.
यहां तक कि उसकी पत्नी को भी नहीं. यह तो हुई कहानी की बात. पर यह आधुनिक जीवन का यथार्थ भी यही है. लोग नौकरी करते वक्त, परिवार को नजरंदाज कर वक्त ही नहीं देते. परिवार के लोग भी कब तक इंतजार करेंगे? वे भी अपना समय व्यतीत करने के लिए अलग -अलग तरीके ढूंढ लेते हैं. अब उनसे ये अपेक्षा करना कि उस व्यक्ति को वह अपना समय दे, जिसने जरूरत के वक्त परिवार को वक्त नहीं दिया, बिल्कुल बेमानी है.
सीमा साही, बोकारो
