बचपन जीवन का सबसे यादगार क्षण होता है. हर इनसान को जन्म से जीने का अधिकार है, बच्चों को अपने दोस्तों के साथ खेलने का, स्कूल जाने का, माता-पिता के प्यार को एहसास करने का तथा प्रकृति की सुंदरता का आनंद लेने का पूरा अधिकार है. जबकि सिर्फ माता-पिता और शोषकों की गलत समझ के कारण बच्चों को बड़ों की तरह जीवन बिताने पर मजबूर होना पड़ रहा है.
कुछ बच्चों को चंद रुपये की खातिर अपना बचपन कुरबान करना पड़ रहा है. माता-पिता को परिवार की जिम्मेदारी खुद से लेनी चाहिए तथा अपने बच्चों को उनका बचपन प्यार और अच्छी परवरिश के साथ जीने देना चाहिए. पूरी दुनिया में बाल मजदूरी एक जघन्य अपराध है. यह देश के विकास को प्रत्यक्षत: प्रभावित कर रहा है.
बाल मजदूरी से बच्चों को बचाने की जिम्मेदारी देश के हर नागरिक की है. यह एक सामाजिक समस्या है जो लंबे समय से चल रही है और इसे जड़ से उखाड़ने की जरूरत है. आइए हम सब मिल कर बाल-मजदूरी की प्रथा को नियंत्रित करने का प्रयास करें.
माणिक मुखर्जी, जमशेदपुर
