पेड़ लगाना, पेड़ बचाना

अर्से से सुनता आ रहा हूं, एक पेड़ सौ पुत्र के समान. पेड़ है तो जल है, जल है तो जीवन है. बावजूद इसके कोई असर दिखता नहीं. अभी चंद दिनों पहले रजरप्पा मंदिर के पास से बेशकीमती चंदन के कई पेड़ों को काट लिया गया. एक वर्ष पूर्व भी रजरप्पा मंदिर में बने बगीचे […]

अर्से से सुनता आ रहा हूं, एक पेड़ सौ पुत्र के समान. पेड़ है तो जल है, जल है तो जीवन है. बावजूद इसके कोई असर दिखता नहीं. अभी चंद दिनों पहले रजरप्पा मंदिर के पास से बेशकीमती चंदन के कई पेड़ों को काट लिया गया.
एक वर्ष पूर्व भी रजरप्पा मंदिर में बने बगीचे से ढेर सारे चंदन के पेड़ काट लिये गये थे, जिसका अब तक कोई पता तक नहीं चला. इसी तरह हर रोज प्रदेश के जंगलों से बड़ी तेजी से पेड़ काटे जाने की खबरें पढ़ने-सुनने को मिलती हैं. कई जगह वन भूमि पर अवैध रूप से मकान बन गये हैं, बन रहे हैं.
इसके लिए जंगलों को नष्ट किया जा रहा है. आखिर ये कौन लोग हैं और इनके विरुद्ध कोई कार्रवाई क्यों नहीं होती? ऐसे में पेड़ लगाओ अभियान बेमानी तथा दिखावा लगता है. अभी राज्य में पेड़ लगाओ अभियान जोर-शोर से चल रहा है, जिसकी बानगी अखबारों में दिखती है. पेड़ लगाना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है पेड़ बचाना.
संतोष सिन्हा, गोला रोड, रामगढ़

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