देहात और शहर में तुलना

अक्सर लोगों में चर्चा होती है कि वह देहात से है. कुछ शहर के लोग तो देहात को पता नहीं क्या समझ लेते हैं कि देहाती लोगों को नीची नजर से देखते हैं. उन शहरी बाबू को यह नहीं पता होता है कि जो सुख शांति देहात में है, उसकी परिकल्पना शहर में नहीं की […]

अक्सर लोगों में चर्चा होती है कि वह देहात से है. कुछ शहर के लोग तो देहात को पता नहीं क्या समझ लेते हैं कि देहाती लोगों को नीची नजर से देखते हैं. उन शहरी बाबू को यह नहीं पता होता है कि जो सुख शांति देहात में है, उसकी परिकल्पना शहर में नहीं की जा सकती.
हमारे देश में तो करीब 70 फीसदी क्षेत्र देहात ही है, तो क्या हमें शोभा देता है कि इतने बड़े जनसंख्या वाले क्षेत्र को छोटा नजर से देखा जाये? भारत जैसे देश की प्राचीन परंपरा को काफी हद तक देहात के लोगों ने ही बचा रखी है. आज गांव-देहात में ही हरियाली नजर आती है. वहीं, शहरों में गंदगी भरी पड़ी है. आज के युग में कोई किसी से कम नहीं है. आज ऊंचे ओहदों पर भी देहाती लोग काबिज हैं. गांव के लोग जब शहर के लोगों की इज्जत करते हैं, तो उनको भी गांव के लोगों का ख्याल रखना चाहिए.
मिथिलेश शर्मा, चंदनक्यारी

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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