विवादों की जड़ कश्मीर!

मजहब और मुल्क दोनों ही ऐसी चीजें हैं, जो लोगों को जोड़ती हैं, उन्हें सामाजिक रूप से प्रेम और अमन से रहना सिखाती हैं. कभी -कभार जब यही कारक अनायास उपजे विपरीत परिस्थितियों का कारण बनती है, तो दर्द होता है, हमें भी और शायद खुदा को भी. यकीनन, भारत का वो हिस्सा है कश्मीर, […]

मजहब और मुल्क दोनों ही ऐसी चीजें हैं, जो लोगों को जोड़ती हैं, उन्हें सामाजिक रूप से प्रेम और अमन से रहना सिखाती हैं. कभी -कभार जब यही कारक अनायास उपजे विपरीत परिस्थितियों का कारण बनती है, तो दर्द होता है, हमें भी और शायद खुदा को भी. यकीनन, भारत का वो हिस्सा है कश्मीर, जो दशकों से मजहबी टकराव और खून-खराबे की गवाह बनी, अपना वजूद तलाशने को मजबूर है.
कभी पाकिस्तानी कौम, तो कभी अपने मुल्क के सत्तानायक इस हिस्से पर दावेदारी दिखाते हुए तर्कों-कुतर्कों भरी आंधी को हवा देते हैं. कई दफा तो दोनों मुल्कों का अड़ियलपन खूनी संघर्ष को अंजाम दे बैठता है. ऐसे संघर्ष के छींटे अक्सर बेगुनाह लोगों के दामन पर पड़ते हैं. संघर्षों का यह सिलसिला कब तक चलेगा, नहीं पता, पर हर कोई वाकिफ है कि इनसे सिवाय दर्द व रुदन के कुछ खास हासिल नहीं होनेवाला.
आदित्य शर्मा, दुमका

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