हजारीबाग जिले में राज्यस्तरीय विश्वविद्यालय है, जिसमें विभिन्न विषयों की पढ़ाई होती है, पर प्लेसमेंट ना के बराबर है. युवाओं को उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बावजूद पलायन करना पड़ता है. यहां न तो कोई उद्योग है और न ही कोई अवसर. आइटीआइ, जिला उद्योग व नियोजनालय कार्यालय पूरी तरह से रोजगार देने-दिलाने में विफल हैं.
हालात यह है कि शिक्षित युवाओं को दुकान खोलने पड़ रहे हैं या वहां काम करना पड़ रहा है. नेताओं के वादे सिर्फ चुनावी साबित हो रहे हैं. नेताओं को समझना होगा कि इन्हीं युवाओं के दम पर वह चुनाव जीत कर आते हैं और इनकी शिक्षा व क्षमता को यदि दिशा दी जाये, तभी राज्य और देश की तरक्की होगी.
अमित केसरी, हजारीबाग
