किसान क्यों करे खेती?

देश के किसान बदहाली के शिकार हैं. लगातार कर्ज के बढ़ने से किसानों के आत्महत्या की घटनाएं भी बढ़ रही हैं. राष्ट्रीयकृत बैंकों द्वारा किसानों को आसानी से कर्ज मुहैया नहीं कराया जाता है, जिस वजह से किसानों को महाजनों, सूदखोरों से अधिक ब्याज दर पर ऋण लेना पड़ता है. सूखे जैसी प्राकृतिक आपदा के […]

देश के किसान बदहाली के शिकार हैं. लगातार कर्ज के बढ़ने से किसानों के आत्महत्या की घटनाएं भी बढ़ रही हैं. राष्ट्रीयकृत बैंकों द्वारा किसानों को आसानी से कर्ज मुहैया नहीं कराया जाता है, जिस वजह से किसानों को महाजनों, सूदखोरों से अधिक ब्याज दर पर ऋण लेना पड़ता है.
सूखे जैसी प्राकृतिक आपदा के कारण किसानों द्वारा खेती पर खर्च की गयी मूलधन राशि भी प्राप्त नहीं हो पाती. किसानों को अन्नदाता कहा जाता है लेकिन सरकार की उपेक्षा के कारण ये अन्नदाता आज खुद अन्न के मोहताज बन गये हैं.
सरकार द्वारा सिंचाई योजना पर करोड़ों रुपये खर्च किये गये हैं लेकिन धरातल पर इसकी स्थिति कुछ और ही है. अधिकांश सिंचाई योजना पर ठेकेदारी के अलावा कुछ नहीं हुआ. सिंचाई योजना को जैसे-तैसे पूरा कर पैसे की निकासी कर ली गयी. सरकार को किसानों की समस्या पर गंभीरतापूर्वक विचार करने की दरकार है.
प्रताप तिवारी, सारठ

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