विरोध की अतिशयोक्ति

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर विश्व के कई देशों व धर्मावलंबियों ने जिस उल्लास व उत्साह के साथ अपनी सहभागिता दिखायी, वह अद्भुत है. योग के माध्यम से भारत ने अपनी समृद्ध प्राचीन सभ्यता व संस्कृति की झलक संपूर्ण विश्व के सामने दिखलायी. वहीं, हमारे ही देश के कुछ राजनीतिक दल व नेताओं ने खुद को […]

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर विश्व के कई देशों व धर्मावलंबियों ने जिस उल्लास व उत्साह के साथ अपनी सहभागिता दिखायी, वह अद्भुत है. योग के माध्यम से भारत ने अपनी समृद्ध प्राचीन सभ्यता व संस्कृति की झलक संपूर्ण विश्व के सामने दिखलायी.

वहीं, हमारे ही देश के कुछ राजनीतिक दल व नेताओं ने खुद को इससे दूर रखा और इसकी आलोचना भी की. यह अत्यंत दुखदायी है. इसे विरोध की अतिशयोक्ति नहीं तो और क्या कहेंगे? वह भी तब, जब बात राष्ट्रीय गौरव व अस्मिता से जुड़ी हो.

अमित अनुपम, कोलकाता

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