पिछले कुछ दिनों से झारखंड के लगभग हर गांव में डोभा बनाने का हलचल मचा हुआ है. रघुवर सरकार ने गांव के विकास के लिए और पानी को बचाने के लिए यह तरीका निकाला है. इसके लिए जहां हर ओर सरकार की वाहवाही हो रही है, वहीं हकीकत कुछ और ही है. डोभा के लिए सरकार द्वारा निर्धारित पूरी राशि, सरकारी दफ्तरों में बैठे भ्रष्ट अधिकारियों के चलते जनता तक पहुंच नहीं पा रही है. एक तरफ जहां इस योजना से लोगों को लाभ मिलना चाहिए, वहीं हर जगह जेसीबी लगाकर काम पूरा किया जा रहा है.
डोभा को पानी संग्रह करने के मकसद से नहीं, बल्कि अपनी जेब भरने के लिए बनाया जा रहा है. यदि सरकार को वास्तव में पानी बचाने का प्रयास करने का इरादा होता, तो वह डोभा को विस्तृत रूप देकर तालाब का निर्माण कराती़ डोभा निर्माण के साथ-साथ कुछ दुर्घटनाएं भी हाल में घट चुकी हैं, जिनकी हम अनदेखी नहीं कर सकते हैं. सरकार को डोभा की जांच के लिए विशेष टीम की आवश्यकता है, वरना इस योजना के तहत सरकारी राजस्व का घाटा ही समझा जायेगा.
मिथिलेश शर्मा, चंदनकियारी
